मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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प्रेम की प्रकृति किसी कोमल पौधे की तरह होती है, जिसे पनपने के लिए अनुकूल वातावरण की आवश्यकता होती है, वहीं सम्मान वह आधारशिला है, जिस पर प्रेम की इमारत टिकी होती है। जहॉ एक-दूसरे के विचारों, सीमाओं और अस्तित्व का आदर नहीं होता, वहॉ प्रेम अधिक समय तक नहीं टिक सकता। जब हम किसी को सम्मान देते हैं, तो हम उन्हें सुरक्षित महसूस कराते हैं । असुरक्षा और अपमान प्रेम के सबसे बड़े शत्रु हैं । जहॉ सम्मान नहीं होता, वहॉ प्रेम धीरे-धीरे दम तोड़ देता है।जहॉ आपकी भावनाओं की कद्र नहीं हैं, वहां छोटा सा स्नेह भी गहरा रिश्ता बन जाता है ।
प्रेम कोई ऐसी वस्तु नहीं है, जिसे ज़बरदस्ती रोककर रखा जाए। यह एक स्वतंत्र पक्षी है, जो केवल उसी डाल पर बैठता है, जहां उसे आदर सम्मान मिलता है और केवल उसी बाग में चहकता है, जहॉ उसे श्रद्धा और ह्रदय भाव से सींचा जाता है। यदि आप चाहते हैं कि आपके जीवन में प्रेम स्थायी और समृद्ध बना रहे, तो उसे केवल महसूस ना करें, बल्कि उसे सम्मान दें और उसकी गरिमा को पूजें।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

