मूकनायक/रिपोर्टर, राजेश कुमार/बस्ती/उत्तर प्रदेश
बस्ती । महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत हुए विकास कार्यों में निर्माण सामग्री के लंबित भुगतान का मुद्दा अब संसद पहुंच गया है। बस्ती के सांसद राम प्रसाद चौधरी ने सदन में यह विषय उठाते हुए सरकार से जल्द भुगतान जारी करने की मांग की।
सांसद चौधरी ने बताया कि मनरेगा के तहत गांवों में सड़कें, नालियां, पंचायत भवन और अन्य स्थायी परिसंपत्तियां बनाई गई थीं। इन कार्यों में कुल लागत का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा निर्माण सामग्री पर खर्च होता है। उन्होंने कहा कि इसी हिस्से का भुगतान पिछले करीब ढाई वर्षों से लंबित है।
उन्होंने सदन को अवगत कराया कि भुगतान में हो रही देरी से आपूर्तिकर्ताओं और ग्राम प्रधानों को गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। निर्माण सामग्री उपलब्ध कराने वाले कई लोग लंबे समय से भुगतान न मिलने के कारण आर्थिक दबाव में हैं।
सांसद राम प्रसाद चौधरी ने सरकार से प्राथमिकता के आधार पर मनरेगा के लंबित मटेरियल भुगतान को जल्द जारी करने की मांग की। उनका कहना था कि इससे संबंधित लोगों को राहत मिलेगी और ग्रामीण विकास कार्यों की गति भी प्रभावित नहीं होगी।
स्थानीय स्तर पर भी इस मामले को लेकर असंतोष बढ़ रहा है। ग्राम प्रधानों और सामग्री आपूर्तिकर्ताओं का कहना है कि बकाया भुगतान के कारण वे आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं और भविष्य के विकास कार्यों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस समस्या का समय पर समाधान नहीं हुआ, तो मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण योजना की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है। सरकार को लंबित भुगतान का शीघ्र निस्तारण कर भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए ठोस व्यवस्था बनानी चाहिए।

