Friday, April 17, 2026
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भारत मुक्ति मोर्चा एवं राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा ने विभिन्न मांगों को लेकर राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन।

मूकनायक न्यूज/दिलीप कुमार/सिरोही/राजस्थान।

सिरोही: ओबीसी जाति आधारित जनगणना कराने, मजबूत यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन एक्ट लागू करने, 2011 से पहले नियुक्त सभी शिक्षकों को टीईटी से मुक्ति देने और ईवीएम मशीनों में कथित चुनावी धांधली रोकने के लिए या तो ईवीएम पूरी तरह हटाकर पुरानी बैलट पेपर व्यवस्था बहाल करने या सभी वीवीपीएटी पर्चियों की 100% गिनती अनिवार्य करने की मांग को लेकर आज मंडार नायब तहसीलदार को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा गया।भारत मुक्ति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मान्यवर वामन मेश्राम तथा राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मान्यवर चौधरी विकास पटेल के संयुक्त आह्वान पर चरणबद्ध आंदोलन के तहत भारत मुक्ति मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने जिला मुख्यालय सिरोही अतिरिक्त जिला कलेक्टर को ज्ञापन दिया। जिला मुख्यालय के अलावा तहसील मुख्यालय आबूरोड, पिंडवाड़ा तथा उप तहसील मुख्यालय कालंद्री, कैलाश नगर, मंडार, देलदर, भावरी ज्ञापन सौंपकर आरोप लगाया गया कि आजादी के बाद से शासक जाति लगातार ओबीसी, एससी और एसटी के हितों के साथ षड्यंत्र कर रही हैं। जनगणना के नोटिफिकेशन में ओबीसी जाति का अलग कॉलम न रखना इसी साजिश का हिस्सा है। इससे पिछड़े वर्गों को शासन-प्रशासन में उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिल पा रहा है। इसलिए तत्काल प्रभाव से ओबीसी की जाति आधारित गिनती करवाकर शासन प्रशासन में उनके प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित किया जाए।दूसरा प्रमुख मुद्दा यूजीसी बिल को लेकर है। ज्ञापन में कहा गया कि सरकार ने पहले कमजोर यूजीसी बिल बनाया और फिर सुप्रीम कोर्ट में कमजोर पैरवी कर उस पर रोक लगवा दी। यह ओबीसी, एससी और एसटी छात्रों के साथ साथ देश के भविष्य के साथ शासक जातियों की खुली धोखेबाजी है। मांग की गई कि मजबूत यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन एक्ट बनाकर इसे तुरंत लागू किया जाए।तीसरा मुद्दा शिक्षकों से जुड़ा है। 2011 से पूर्व नियुक्त सभी शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) से मुक्त करने की मांग रखी गई।चौथा और अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्दा चुनावी प्रक्रिया में ईवीएम मशीनों की विश्वसनीयता को लेकर उठाया गया। संगठनों का आरोप है कि शासक जातियां ईवीएम के जरिए चुनावी धांधली कर बहुजन समाज के प्रतिनिधित्व पर डाका डाल रही हैं। इसलिए या तो ईवीएम मशीनें पूरी तरह हटाकर पुरानी पेपर बैलेट व्यवस्था बहाल की जाए या कम से कम सभी वीवीपीएटी पर्चियों की 100% गिनती अनिवार्य कर लोकतंत्र को बचाया जाए।यह ज्ञापन जिला मुख्यालय सिरोही एडवोकेट सुंदरलाल मोसलपुरिया, मदनलाल चौहान, एडवोकेट नरेंद्र सिंह आसिया, एडवोकेट हिम्मत सिंह आढ़ा, एडवोकेट कलीम अव्वल बहुजन क्रांति मोर्चा के जिला संयोजक सुंदरलाल मोसलपुरिया के नेतृत्व में अतिरिक्त जिला कलेक्टर के माध्यम से राष्ट्रपति को सौंपा गया।कालंद्री उप तहसील छगनलाल कुंडला व नवाराम सूर्याल नेतृत्व में दिया। कैलाश नगर उप तहसील मांगीलाल ओडा के नेतृत्व में दिया। उप तहसील मंडार भवानी शंकर गर्ग व मफतलाल बुनकर के नेतृत्व में दिया ।आबूरोड तहसील मुख्यालय माधुराम परिहार के नेतृत्व में दिया । उप तहसील देलदर कालूराम प्रजापत के नेतृत्व में राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा द्वारा ज्ञापन दिया गया । उप तहसील भावरी नायब तहसीलदार को धन्नालाल डाबी के नेतृत्व में ज्ञापन दिया गया । पिंडवाड़ा तहसील मुख्यालय छगनलाल परमार के नेतृत्व में तहसीलदार को ज्ञापन दिया गया । भारत मुक्ति मोर्चा पदाधिकारियों चेतावनी दी कि यदि उपरोक्त चारों मांगें तुरंत नहीं मानी गईं तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। 13 मार्च 2026 को देश के सभी 725 जिला मुख्यालयों पर धरना-प्रदर्शन, 23 मार्च 2026 को रैली प्रदर्शन तथा 23 अप्रैल 2026 को राष्ट्रव्यापी भारत बंद संवैधानिक और शांतिपूर्ण तरीके से व्यापक स्तर पर आयोजित किया जाएगा।सामाजिक कार्यकर्ता मफतलाल बुनकर ने मीडिया से बातचीत में कहा, “हमारा संघर्ष ओबीसी, एससी, एसटी सहित भारत के समस्त नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों और लोकतंत्र की रक्षा के लिए है। शासक जाती के निरंतर षड्यंत्र अब बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे। यदि सरकार नहीं मानी तो आंदोलन पूरे देश में फैल जाएगा।”पदाधिकारियों ने जोर दिया कि ये सभी मांगें न्यायपूर्ण और संवैधानिक हैं तथा पिछड़े वर्गों के हक की लड़ाई है। इस अवसर पर निम्नलिखित कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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