Thursday, February 26, 2026
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दबोह थाने में अराजकता, पुलिस पर गंभीर सवाल

टीआई की अनुपस्थिति में पुलिस की मनमानी

निर्दोष फंसे, फरियादी ठगे
— पारदर्शिता और जवाबदेही पर उठे सवाल

बुद्धप्रकाश बौद्ध पत्रकार भिंड/ मूकनायक न्यूज

दबोह (भिंड), 04 सितंबर।

दबोह थाना इन दिनों अपने मूल कर्तव्य – जनसेवा और न्याय – से भटकता प्रतीत हो रहा है। टीआई राजेश शर्मा के अवकाश पर जाने के बाद थाना प्रभारी एसआई भानु प्रताप चौहान और उप निरीक्षक रविंद्र माँझी के नेतृत्व में अमले की मनमानी बढ़ गई है। अपराध नियंत्रण शिथिल है, पारदर्शिता नदारद है और जवाबदेही मानो कहीं खो गई है।

वसूली और रफा-दफा के आरोप

स्थानीय नागरिकों और फरियादियों का आरोप है कि थाने में शिकायत सुनने के नाम पर वसूली की जा रही है। वहीं आरोपियों से मामले दबाने या रफा-दफा करने के एवज में मोटी रकम ली जाती है। यह हालात कानून की रक्षा करने वाले महकमे पर ही गंभीर सवाल खड़े करते हैं।

मीडिया से दूरी, जनता अंधेरे में

थाने का रवैया इतना बंद-दरवाज़ा हो गया है कि मीडिया तक को घटनाओं की जानकारी साझा नहीं की जाती। इससे जनता सच्चाई से अनभिज्ञ रह जाती है। पारदर्शिता और जवाबदेही से दूरी लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत मानी जा रही है।

बिना जांच एफआईआर, निर्दोषों का दर्द

बीते दिनों कई एफआईआर बिना जांच के दर्ज कर ली गईं, जिनमें निर्दोषों को भी आरोपी बना दिया गया। एक युवक ने बताया कि वह घटना के समय मौके पर मौजूद ही नहीं था और उसके पास सीसीटीवी फुटेज तक है, फिर भी उसका नाम एफआईआर में शामिल कर लिया गया। सवाल यह है कि जब जांच ही नहीं हुई, तो नाम किस आधार पर जोड़े गए?

न्याय की आस और अदालत का सहारा

पुलिस की इस मनमानी से तंग आकर कई निर्दोष लोग अदालत की शरण लेने की तैयारी कर रहे हैं। लेकिन इससे पहले ही सवाल उठ रहा है कि क्या पुलिस इतनी हल्की जिम्मेदारी निभा सकती है कि “नाम गलत जुड़ गया तो बाद में हटा देंगे” कहकर मामले को रफा-दफा कर दे?

वे घटनाएं जो पुलिस पर सवाल खड़े कर रही हैं

  1. फर्जी एफआईआर 17 अगस्त को मारपीट के एक मामले में निर्दोष युवक पर झूठी एफआईआर दर्ज की गई।
  2. मोबाइल वापसी में वसूली – चोरी या गुम हुए मोबाइल वापस कराने के नाम पर रिश्वत मांगी जाती है या फिर फरियादी को भिंड सायबर सेल भेजकर टरका दिया जाता है।
  3. पुलिस जवान की दबंगई– हाल ही में पुलिस कॉलोनी में एक जवान ने एक बाहरी युवक को पेशाब करने पर डंडों से पीटा।
  4. रिश्वत का ताज़ा मामला – 02 सितंबर को दो सिपाहियों ने एक व्यक्ति से खुलेआम 3500 रुपये की रिश्वत ली।
  5. बिना जांच रिपोर्ट – एक अन्य मामले में दो युवकों पर बिना जांच किए मुकदमा दर्ज कर दिया गया।

जनता का विश्वास डगमगाया

दबोह की जनता नए थाना प्रभारी से नाराज़ है और वरिष्ठ अधिकारियों से सख्त कार्रवाई की मांग कर रही है। नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते इन अराजक स्थितियों पर रोक नहीं लगी तो निर्दोषों का जीवन बर्बाद होगा और अपराधियों को खुली छूट मिल जाएगी।

यह खबर केवल घटनाओं का ब्यौरा नहीं, बल्कि पुलिस महकमे पर जनता के भरोसे की डगमगाहट और जवाबदेही की माँग है। वरिष्ठ अधिकारियों के लिए यह संकेत है कि अब “कड़ी कार्रवाई” से ही भरोसा बहाल हो सकता है।

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