मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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आवेशित हुए बिना संतुलित रहना” एक कौशल है, जिसे सीखा और विकसित किया जा सकता है। यदि आप इस पर काम करते हैं, तो आप अपने जीवन में अधिक शांति और खुशी पा सकते हैं। संतुलित जीवन, चाहे वह व्यक्तिगत हो या पर्यावरणीय, एक आवश्यक गुण है जो हमें सुखी और स्वस्थ जीवन जीने में मदद करता है। “आवेशित हुए बिना संतुलित रहने” का अर्थ है, बिना किसी बाहरी उत्तेजना या आवेश के, अपने जीवन में स्थिरता और संतुलन बनाए रखना। यह एक ऐसी स्थिति है, जहां व्यक्ति अपनी भावनाओं, विचारों और कार्यों पर नियंत्रण रखता है और जीवन की चुनौतियों का सामना धैर्य और समझदारी से करता है।
धैर्यपूर्वक सबकी बातों को सुनना और बिना आवेशित हुए संतुलित उत्तर देना, यह गुण जिस व्यक्ति के पास होता है, वह सभी के लिए विशेष और प्रिय हो जाता है…!! मुश्किल नहीं है जिंदगी को समझना, जिस तराजू पर दूसरों को तोलते हो, उस पर बस खुद बैठकर देखना…! हालात वो ना होने दें कि हौसला बदल जाये, बल्कि हौसला वो रखें कि हालात ही बदल जाये। आवेशित हुए बिना रहने से तनाव, चिंता और अवसाद जैसी मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा कम होता है। आवेशित हुए बिना रहने से आप अपने रिश्तों में बेहतर समझदारी और धैर्य दिखा पाते हैं, जिससे आपके रिश्ते भी मजबूत होते हैं।
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

