Friday, April 17, 2026
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बाबा साहब डॉ . अंबेडकर का जीवंत चित्रण

मूकनायक/ देश

राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा

गांधी जी की हत्या

😡😡 एक दुर्घटना जो जनवरी 1948 में गांधीजी की हत्या करने में घटी, उससे सम्बन्धित सूचना को ईवनिंग न्यूज में मुख्य खबर में छापा गया था मैं शाम को जब अपने दफ्तर से वापस यह समाचार पत्र लेकर सीधा बाबा साहेब के कमरे में पहुँचा तो वह अपनी रोजमर्रा की आदत के अनुसार सो रहे थे। कान्स्टीच्यूट असैम्बली से वापस लौटने पर वह सायं छह-सात बजे एक घण्टा अवश्य सोया करते थे। मैंने ही सबसे पहले बतलाया कि अभी-अभी बिरला हाऊस में गांधीजी की किसी गोड्से नामक महाराष्ट्रीय ब्राह्मण ने पिस्तौल से गोली मारकर हत्या कर दी है।

👉 बाबा साहेब यह भयानक खबर जानकर एकदम चुप हो गये और उदासी के चिह्न स्पष्ट उनकी मुखमुद्रा पर दिखाई दिए। उन्होंने अंग्रेजी में कहा (It is not good to be too good) इसका अभिप्राय यह है कि अत्यन्त अच्छा होना भी भयप्रद होता है।

😡😡 गाँधी जी की हत्या की प्रतिक्रिया महाराष्ट्र में ही बहुत अधिक हुई नॉन ब्राह्मण ( मराठों ) ने बम्बई, पूना, सतारा, कोल्हापुर नगरों तथा ग्रामों में ब्राह्मणों को जान से मारा और लूटा उनके घर फ़ूंक दिए एवं उनकी बहू बेटियों का शील भंग किया, इसमें ब्राह्मण द्वारा गान्धी जी की हत्या का तो महज बहाना था,वस्तुत : नॉन ब्राह्मणों के ‘ दिलों में ब्राह्मणों के प्रति जो प्रतिशोध की आग अन्दर ही अन्दर सुलग रही थी, इस दुर्घटना से वह भभक उठी, महाराष्ट्र में सांगली एक ब्राह्मण शासित छोटा सा राज्य था, उसकी बहुत दुर्गति की गई, ब्राह्मणों के घर जलाए गए, उन्हें कई अन्य तरीकों से उत्पीडित किया गया सांगली राज्य के तथा महाराष्ट्र के अन्य क्षेत्रों के वयोवृद्ध ब्राह्मणों का एक जत्था बाबा साहेब के पास आया और उनमें से अनेक फूट -फूट कर रोने लगे कि हमें मराठों ने तबाह कर दिया है, बाबा साहेब ने उनकी आहोजारी या करुणक्रन्दन सुनकर कहा कि यह जो कुछ हुआ है मुझे इसको सुनकर अति दुखः हुआ है किन्तु मैं यह कहे बिना नहीं रह सकता कि वर्णव्यवस्था तथा जाति पाँति का जो विष वृक्ष तुम्हारे ब्राह्मण पुरखा बो गए हैं, यह उसी वृक्ष का जहरीला फल है जिसे अब तुम्हें चखना पड़ रहा है, बाबा साहेब ने एक ब्राह्मण नेता को सम्बोधित करते हुए कहा कि मैं जब काला राम मन्दिर में प्रवेश करना चाहता था और महाड़ के तालाब में अपने लोगों को पानी लेने के लिए आन्दोलन कर रहा था क्या तुमने उस समय बढ़ -चढ़कर हमारे इन सत्याग्रहों के खिलाफ प्रचार नहीं किया था ? और मराठा आदि लोगों को मुझे जान से मारने के लिए नहीं भड़काया था ? मैंने तुम्हें उसी समय कहा था कि इन जाति -पाँति और ऊँच -नीचता की दीवारों को हटा दो, सबके साथ समता का व्यवहार करो नहीं तो एक दिन ऐसा भी आ सकता है जब तुम्हारी भड़काहट में आने वाले यही नॉन ब्राह्मण तुम्हारा सत्यानाश कर देंगे, कहिए आज मेरी बात सच्ची सिद्ध हुई है कि नहीं, वह वृद्ध ब्राह्मण आँसू बहाते हुए बोला तुम्हारा सब कहना सत्य था, आज तुम्हारी भविष्यवाणी सत्य निकली!
   
👼 उन्हीं दिनों वैदिक स्कॉलर श्रीपाद दामोदर सात्वलेकर का पुस्तकालय जिसमें हजारों ग्रन्थ थे फूक दिया गया था और यह बेचारा संस्कृत और वैदादि शास्त्रों का स्कॉलर किसी प्रकार जान बचाकर पार्डी ( गुजरात ) में शरणार्थी बना और उसने वहाँ अपना शोधकार्य आरम्भ किया, गुरु गोल्वालकर भी बाबा साहेब के पास आए, उनकी दसों उँगलियों में नाना प्रकार की पाषाणजड़ित सुनहरी अंगूठियाँ पहनी हुई मैंने अपनी आँखों से देखी थीं, बाबा साहेब ने कहा कि यह कोई धनी व्यक्ति नहीं है किन्तु सोने के हीरे जड़ित यह अंगूठियाँ इसे राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के गुरुदक्षिणा पूजा के अवसर पर दक्षिणा में मिली है, देखिए इस देश के पोप एक नहीं दो नहीं दसों उँगलियों में दसियों प्रकार की अंगूठियाँ पहने हुए हैं ऐसे गुरु जिस देश में होंगे उसका कभी कल्याण कभी नहीं हो सकता, सदाशिव गुरु गोल्वलकर बाबा साहेब से मराठी में बातें करते रहे जिन्हें मैं, बहुत कम ही समझ पाया था क्योंकि मैं मराठी से अनभिज्ञ था किन्तु बातचीत का भावार्थ यही था कि मराठों का मुकाबला करने के लिए मराठा इन सब जातियों का संगठन होना चाहिए नहीं तो इन्होंने आज ब्राह्मणों पर अत्याचार ढाया है कल अछूतों पर भी अत्याचार करेंगे, मराठों की बहुसंख्या गिनती और भूस्वामित्व बल सब नॉन मराठों को समाप्त कर देगा!
   
👼 मैं इसका उपाय करने के लिए आपके पास आया हूँ, बाबा साहेब ने भी गुरु गोल्वलकर से बातचीत मराठी में की जिसे मैं भलीभांति तो न समझ पाया किन्तु बातों – बातों में बाबा साहब ने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के उस नेता को कहा कि तुम चितपावन ब्राह्मण हो, तुम्हारे पुरुखा पेशवा जिनके हाथ में देश के प्रशासन की बागडोर रही उनका सलूक हम अछूतों के साथ कैसा था ? तुम्हारे पेशवा महाराजाओं ने भी तो पूना ( पेशवा राजधानी ) में अछूतों के गले में मिट्टी की हंडिया बाँधने, कमर पर झाडू बांध कर सड़कों पर चलने का आदेश दे रखा था, ताकि अछूत थूकें तो उस मिट्टी की हन्डिया में ही थूकें कदाचित उनके थूक से मार्ग भ्रष्ट न हो जाए और कमर में झाड़ू बाँधने के आदेश इस कारण दिए ताकि अछूतों के पैरों के निशान मिटते चले जाएँ और उनके पदचिन्हों पर चलकर कोई सवर्ण हिन्दू विशेषतः ब्राह्मण भ्रष्ट न हो जाएं महाराष्ट्र में जो आग लग रही है और ब्राह्मण नारियों की इज्जत लूटी जा रही है, उनके घर जलाए जा रहे हैं केवल इसलिए क्योंकि गांधीजी के हत्यारे नाथूराम गोडसे चितपावन जात -बिरादरी का ब्राह्मण है ? तुम्हारा यह राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ भी तो ब्राह्मणों का ही एक संगठन हैं, इसमें न तो महार अछूत हैं और न ही मराठे अभी तो अपने पुरखों के पहले बोए विषवृक्ष का फल चख रहे हो, अब तुमने एक और साम्प्रदायिक विष वृक्ष बोना आरम्भ कर दिया है, इसका भी बहुत बुरा प्रभाव निकलेगा, तुम संघ बनाते हो तो बनाओ, किन्तु जात पात मिटाने ,वर्ण -व्यवस्था का नाश करने के लिए संगठन बनाओ, अब पिछली भूल को सुधारो ऐसे संगठन पुनः ब्राह्मण चितपावन राज कायम नहीं कर सकेंगे, यह सब बातें बाबा साहेब ने हमें गुरु गोलवाल्कर के चले जाने पर हिंदी में बताई, गुरु गोल्वलकर खामोशी से उनकी बातें सुनता रहा किन्तु किसी भी प्रसंग का उत्तर दिए बगैर उठकर चला गया….
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बाबा साहब डा.अम्बेडकर के सम्पर्क में पच्चीस वर्ष- सोहनलाल शास्त्री
पेज 52 – 55
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:- ए पी सिंह निरिस्सरो
जय भीम जय भारत जय संविधान

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