मूकनायक
देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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मनुष्य में असीमित इच्छाओं की उत्पत्ति के साथ ही दुखों का जन्म होता है । यदि हम गहनता से विचार करें तो दुख का कारण सुख भोग से होता है । प्यास लगने पर मनुष्य दुखी हो जाता है और पानी से प्यास मिटाने पर सुख का अनुभव करते है ।
वहीं जब हम अपनी असीमित इच्छाओं के सुख को ओर बढ़ाना चाहते हैं तो इसमें कमी आती है और मन पुनः दुखी हो जाता है परंतु जिस समय हम स्वयं को ही दुख का कारण मानने लगते हैं तो दुख भी दूर होने लगता है । अतः इंसान के लिए अपनी इच्छाओं को सीमित और मन को संतुष्ट रखकर सत्कर्म करना ही हितकारी है ।
लेखक
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

