प्रवीण बागड़े
नागपूर
९९२३६२०९१९
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१९ वीं शताब्दी में विश्व के अनेक भिक्षुओं को ऐसा लगा कि बुद्ध धर्म का जैसा चिह्न सम्राट अशोक ने (चौबीस तीलियों का चक्र सारनाथ के सिंह स्तम्भ पर) प्रस्थापित किया, वैसा ही झंडे के रूप में एक ध्वज (धम्म पताका) होनी चाहिए।
धम्म सभा में अनेक मत और विचार सामने आए।अंत में श्रीलंका की धम्मसभा में १८८० में आर.डी. सिन्हा द्वारा तैयार किया हुआ धम्मध्वज विश्वस्तर पर ८ जनवरी १८९१ में सर्वसहमति से स्वीकार किया गया। १८८८ में धम्म ध्वज में बदलाव करके आगे यह रंग जोड़े गए। उनका क्रम बाएं से दाहिने की ओर रखा गया।
यह क्रम नीला, पीला, लाल, सफेद और काषाय रंग है। इन पाँच अलग रंग के अलावा बीच में चौबीस तीलियों का अशोक चक्र है, लेकिन इस समय कई धम्म ध्वज पर चक्र नहीं दिखाई देता।
इस ध्वज के आगे पाँच रंग के टुकड़े (स्लिप्ट) और जोड़े गए हैं, इसका क्रम ऊपर से नीचे की ओर नीला, पीला, लाल, सफेद और कषाय है।
यह रंग आगे इसलिए लगाए गए क्यूंकि यह रंग भगवान बुद्ध की विभिन्न शरीर धातुओं को धम्म रश्मियों के प्रतीक समझे जाते हैं। हर रंग की एक विशेषता है|
- नीला : यह रंग विशालता, दूरदृष्टि और अनन्त का प्रतीक माना जाता है। बुद्ध का धर्म विशाल दूर दृष्टि और सागर की तरह अनन्त है। जिसके अन्दर सब कुछ समा लेने की क्षमता है। कोई भी आये और देखे। जो आदि (प्रथम), मध्य और अन्त में भी गुणकारक है, मानवता का कल्याण करने वाला है। धर्म में यह त्याग के बाद ही विशाल बनाता है, इसलिए पंचरंगी ध्वज में यह रंग सम्मिलित किया गया।
- पीला : यह रंग समृद्धि का प्रतीक माना जाता हैं। बड़े-बड़े राजा-महाराजाओं ने सम्राटों ने अपना मस्तक (सर) इस धर्म के आगे झुकाया और वे इस धर्म की शरण में गए। उनको यह धर्म सोना, चाँदी, हीरे, मोतियों से भी बहुत सुन्दर (प्रिय) लगा। सोने का रंग पीला है। सोने जैसा मूल्य (कीमत) देने वाला जीवन समृद्ध और सुखमय बनाने वाला धम्म-प्रकाश, मनुष्य के लिए अन्तिम समय तक उपयुक्त है। भिक्षुओं का पीला वस्त्र यह ज्ञान समृद्धि, वैराग्य, विरक्तता, शुद्धता दर्शक है। इसलिए पंचरंगी ध्वज में यह रंग सम्मिलित किया गया।
- लाल : यह रंग अग्नि का प्रतीक माना जाता है। धर्म में प्रविष्ट होना है तो धर्म को ठीक तरह से समझ लेना होगा, तो अग्नि के समक्ष जाना पड़ेगा।अपने अन्दर के राग, द्वेष, लोभ, मोह, काम, मत्सर इन षड् (छह) विकारों की बली अग्नि में देनी चाहिए। तभी उस व्यक्ति को धर्म में प्रवेश मिलेगा। कोई भी व्यक्ति सभी दुर्गुणों को जलाने के बाद ही सद्गुण ग्रहण कर सकता है। दुर्गुण जलाने की पहचान वाला यह लाल रंग पंचरंगी ध्वज में लिया है। लाल हुआ लोहा जैस योग्य आकार लेता है। वैसे ही सभी मलों से रहित हुआ व्यक्ति ही धम्म सेवन कर सकता है।
- सफेद : यह रंग पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। शुद्धता, निर्मलता और पवित्रता इनका प्रतीक सफेद रंग है। अगर बुद्ध धर्म की शरण में जाकर उसका आचरण करना है तो उस व्यक्ति को शुद्ध दुष्कृत्य (पाप) रहित मनुष्य जैसा ही आचरण रखना चाहिए। इसके लिए उसे धर्म की आवश्यकता है।उसे अपना जीवन शुद्ध और मंगलमयी बनाने की प्रेरणा यह रंग देता है। इसलिए यह रंग पंचरंगी ध्वज में सम्मिलित किया गया।
- काषाय : (यह रंग केसरिया नहीं है)
यह रंग वैराग्य, विरक्तता, त्याग, सेवा का प्रतीक माना जाता है।प्रत्येक व्यक्ति को धर्म के लिए समाज के लिए त्याग करने की भावना यह रंग देता है। जिस प्रकार से भिक्षु विरक्त होते हैं। उनका यह महान त्याग है। उपासकों को भी त्याग, सेवा का थोड़ा-थोड़ा लाभ उठाना चाहिए। इसमें से ही धर्म-क्रान्ति होती है।इसके लिए धर्म देसना (उपदेश), लेन-देन से धर्म के लिए पुत्र दान, धर्म, धन, ज्ञान, भोजन, वस्त्र, आवास, धम्म विहार दान ऐसे अनेक दानों के लिए तैयार होने की प्रेरणा यह रंग उपासकों को देता है। इसलिए यह रंग पंचरंगी धम्म ध्वज में सम्मिलित किया गया है।
धम्म ध्वज वन्दना : ध्वजारोहण करते समय अक्सर त्रिशरण पंचशील की उच्चारण किया जाता है; किन्तु यह ठीक नहीं है। ध्वज फहराते समय निम्न गाथाएँ कहनी चाहिए | विश्व बौद्ध धम्म ध्वज दिवस की शुभकामनाए |

