मूकनायक
देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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जीवन को, जीवन की दृष्टि से जीने का अनुभव ही जीवन में अतंर्दृष्टि को खोलने का आधार है। अगर हम दुःखों को देखने जाएंगे, तो धरती पर ऐसा कौन-सा प्राणी है जिसे अपने जीवन में दुःखों और कष्टों का सामना ना करना पड़ा हो। अगर सुखों को निहारते जाएं, तो ऐसा कौन-सा स्थान और घटक है, जहां हम सुखी होकर सुख देखने जाएं और हमें सुख ना दिखाई दे।
वहीं सुख की चाहत में आप कांटों को निहारोगे तो जीवन में कष्ट ही कष्ट दिखाई देंगे और कांटों के ऊपर खिलने वाले गुलाबों पर ध्यान देंगे तो जीवन में खिलावट ही खिलावट नजर आएगी। हमारा जीवन तो हमारे लिए किसी तानपुरे की तरह होता है, जिसके तारों को अगर कसना और साधना आ जाए तो तानपुरे के तार संगीत का सुकून देने लग जाते हैं और अगर तारों को कसना और साधना ना आए तो तानपुरे के तार ही कौए की काँव-काँव बन जाया करते हैं ।
लेखक
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

