मूकनायक/ राजस्थान /अजमेर
कालू राम बैरवा
22.11.1971 को हुआ था जमीन के सवाल पर पहला आदिवासी जनसंहार-पूर्णिया जिले के (धमदाहा अंचल में) रूपसपुर-चंदवा में। इस नृशंस हत्याकांड में 14 संतालों को भूस्वामियों (बिहार विधानसभा के पूर्व स्पीकर, स्वतंत्रता सेनानी तथा साहित्यकार डॉक्टर लक्ष्मीनारायण सुधांशु जी के परिवार के राजपूतों) ने आदिवासियों के घर में आग लगा दी। आदिवासी भागने लगे तो उन पर दनादन गोलियाँ दागने लगे। औरतें, बूढ़े और बच्चे सभी शहीद हुए थे। सैंकड़ों लोग घायल और लापता हो गए थे।
*रेणु और संथाल हत्याकांड…
रेणु अपने ही जिले के इस हत्याकांड से इतने उद्वेलित हुए थे कि 1972 का निर्दलीय प्रत्याशी के रुप में विधानसभा चुनाव लड़ने का यह भी एक कारण बना. रेणु के ही शब्दों में : “पिछले दिनों मेरे ही जिले में जो सबसे दिल दहलाने वाली घटना हुई, यानी चौदह आदिवासी संथाल जला दिए गए, इसने तो मुझे अपनी ही निगाह में गिरा दिया. आप ‘मैला आँचल’ में देखिएगा, बेजमीन संथालों के संघर्ष की कथा 1954 में मैंने लिखी थी. संथालों की समस्याओं को लेकर मैंने जिन खबरों की कल्पना की थी, ऐसा लगा कि वह अठारह वर्षों बाद इस नाटकीयता से दुहराई जा सकती हैं. और तभी इन सवालों को लेकर मेरे अंदर विचार-मंथन चलता रहा, फिर अंततः यह फैसला कि मैं भी इस बार का चुनाव लडूंगा…
मैंने यह फैसला साहित्य के लिए भी किया है. अर्थात फिर इन्वाल्वड हुए बगैर काम चलने का नहीं.”

