Thursday, February 26, 2026
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डॉ.भीमराव अंबेडकर ऑनलाइन काव्य गोष्ठी का हुआ आयोजन

मूकनायक/राजस्थान/जिला ब्यूरो चीफ सांचौर/रिडमल राम परमार

सांचौर – 18 नवंबर 2024 को अंबेडकर सेवा समिति सांचौर के तत्वावधान में संविधान दिवस सप्ताह के अंतर्गत प्रथम ऑनलाइन काव्य गोष्ठी का आयोजन गूगल मीट पर किया गया। इस आयोजन में विभिन्न कवियों ने अपनी उत्कृष्ट रचनाओं के माध्यम से संविधान, समाज और बाबा साहेब के विचारों को प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम की शुरुआत समिति के अध्यक्ष नरेश पातलिया के संबोधन से हुई, जिन्होंने संविधान दिवस सप्ताह के महत्व को रेखांकित किया। मुख्य अतिथि भूप सिंह भारती, हरियाणा ने इस अवसर पर संविधान और बाबा साहेब के योगदान पर अपने विचार रखे। विशिष्ट अतिथियों में वचन मेघ चरली और नरपत परिहार वणधर उपस्थित रहे। वचन मेघ और नरपत परिहार ने इस कार्यक्रम के निर्णायक की भूमिका निभाई।

इस काव्य सम्मेलन में आठ प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिन्होंने अपनी शानदार रचनाओं के माध्यम से संविधान और समाज की विविधताओं को उजागर किया।

झांवता राम बामणिया, रणोदर: सांचौर जिले के आशुकवि झांवता राम ने “संविधान दिवस” और “जय बोलो बाबा साहेब री” कविताओं का वाचन किया। उनकी प्रस्तुति ने संविधान के महत्व को सरल शब्दों में प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत किया।

अरविंद कालमा, भादरूणा: युवा कवि अरविंद ने अपनी ग़ज़ल “महान है मेरा संविधान” में संविधान की विशेषताओं और इसे संरक्षित करने की आवश्यकता पर बल दिया।

राहुल सोलंकी, मंडार: नवोदित रचनाकार राहुल ने “हे भीम, ताज नहीं सरताज कहूंगा” कविता के माध्यम से बाबा साहेब की महानता का वर्णन किया।

बाबूलाल सोलंकी ‘स्नेही’, रानीवाड़ा: उन्होंने “युगों-युगों से रहे उपासक” कविता में संविधान और समाज के बीच गहरे संबंध को प्रभावी ढंग से रेखांकित किया।

दिलीप सोलंकी, आदरवाड़ा: हास्य कवि दिलीप ने “संविधान हूं मैं” कविता के माध्यम से सम्मेलन में हास्य का पुट जोड़ा और श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

जवाहर भाटीप: उन्होंने “क्या उपयोग करोगे या भूल जाओगे” और “बाबा साहेब तुम्हें दलित पुकारे” कविताओं के माध्यम से संविधान के अधिकारों और बाबा साहेब के योगदान को रेखांकित किया।

प्रकाश राज बौद्ध, सीलू: अपनी रचना “वो भीमराव के सपने, अब भी संविधान में जीवित हैं” के माध्यम से उन्होंने बाबा साहेब के सपनों को जीवित रखने का संदेश दिया।

डूंगर पारीक, परावा: राजस्थानी भाषा के कवि डूंगर पारीक ने “चोखी बातां संविधान री” और “मरुधर धरा और मेह” जैसी रचनाओं से अपनी छाप छोड़ी।

मुख्य अतिथि भूप सिंह भारती ने प्रतिभागियों और आयोजकों की सराहना करते हुए संविधान की प्रासंगिकता पर विचार रखे। निर्णायक वचन मेघ ने जातिवाद पर आधारित अपनी कविता “गंडक” प्रस्तुत की, जिसने सभी को प्रभावित किया।

कार्यक्रम के दौरान कवियों के अलावा श्रोताओं ने भी अपनी उपस्थिति से इसे सफल बनाया। प्रमुख श्रोताओं में ACBEO पोपटलाल मेघवाल, नेमीचंद खोरवाल, रमेश खानवत, संजय कालमा, घेवर बौद्ध सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

निर्णायक मंडल ने निष्पक्ष समीक्षा के बाद परिणाम घोषित किए।

प्रथम स्थान: अरविंद कालमा, भादरूणा।
द्वितीय स्थान: बाबूलाल सोलंकी ‘स्नेही,’ रानीवाड़ा।
तृतीय स्थान: डूंगर पारीक, परावा।

कार्यक्रम का संचालन काना राम पारीक और मास्टर भूताराम जाखल ने किया। संयोजक मनीष धोरल ने सभी का आभार व्यक्त किया। अंत में, अध्यक्ष नरेश पातलिया ने समापन की घोषणा करते हुए इस आयोजन को सफल बनाने के लिए सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया।

यह काव्य गोष्ठी संविधान और बाबा साहेब के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने में सफल रही। प्रतिभागियों की प्रस्तुति ने श्रोताओं को संविधान की महत्ता और सामाजिक समानता के प्रति जागरूक किया।

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