मूकनायक/ राजस्थान /अजमेर
कालू राम बैरवा
# पुष्कर मेला बन गया पुष्कर वासियों के लिए झमेला ~ मेले को सफल बनाने में हजारों लाखों रुपए खर्च करने वाले स्थानीय लोगों को आखिर क्यों झेलनी पड़ती है परेशानी ।
# भयंकर अव्यवस्थाओं के बीच भगवान भरोसे संपन्न हुआ पुष्कर मेला , जगह जगह लगे गंदगी के ढेर साफ करना अब नगर परिषद के लिए चुनौती पूर्ण कार्य •••
आखिरकार भगवान ब्रह्मा जी की कृपा से पुष्कर तीर्थ का आध्यात्मिक और पशु दोनों ही मेले भारी अव्यवस्थाएं के बीच शांति पूर्वक ढंग से संपन्न हो ही गया । इस मेले को नजदीक से जानने और समझने के बाद मुझे बचपन में सुनी हुई एक कहावत ( फोकट चंदन घिस मेरे नंदन ) याद आ गई । क्यों की यदि बारीकी से हर व्यवस्थाओं पर , हर आयोजनों पर , पशु मेले सहित मेला मैदान पर होने वाले कार्यक्रमों पर नजर डाली जाए तो समझ में आता है कि जो लोग इसे सफल बनने के लिए दिनरात भागते है , इसके आयोजनों पर हजारों लाखों रुपए खर्च करते है । इसमें हर प्रकार से सहयोग देकर अपनी ऊर्जा और धन खर्च करते है । दरअसल उन लोगों का कही से कही तक कोई जिक्र भी नहीं किया जाता । यहां तक कि उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए सर्टिफिकेट के रूप में कागज का एक टुकड़ा भी नहीं दिया जाता । लेकिन जो केवल तैयारियों के नाम पर बैठके आयोजित करके निर्देश देते है वे अपनी पीठ थपथपाकर क्रेडिट लेने में सबसे आगे रहते है ।
1 :~ पुष्कर मेला शुरू होने के पहले सड़को की मरम्मत , सार्वजनिक स्थानों पर लगे बिजली के पोल में लाइट , पुष्कर कस्बे सहित संपूर्ण घाटों , मेला मैदान एवं मेला क्षेत्र की सफाई , पुष्कर में प्रवेश करने वाले मुख्य रास्तों , कस्बे में जाने वाले रास्तों सहित , पुलिस कर्मियों के लगने वाली चेक पोस्ट पर सैकड़ों बल्लियां लगाकर बेरीकेटिंग लगाने , चिकित्सा विभाग के लिए लगने वाली डिस्पेंसरियों के टेंट , सरोवर किनारे बने घाटों में व्यवस्थाएं , शुभारंभ और समापन पर होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेने वाले स्कूली बच्चों को भोजन सहित न जाने कितनी मेले से जुड़ी ऐसी व्यवस्थाएं है जिसे पुष्कर नगर परिषद द्वारा किया जाता है। इस मेले के लिए नगर परिषद लाखो रुपए का बजट भी खर्च करती है । लेकिन मेला संपन्न हो जाने के बाद सारा क्रेडिट ले जाता है जिला प्रशासन , आखिर क्यों ?

