मूकनायक
राजस्थान/अजमेर
कालू राम बैरवा
बाड़मेर: राजस्थान के बाड़मेर जिले की महिला रूमा देवी दुनियाभर में खुद के नाम का परचम लहरा रही है। हुनर तो कई लोगों में होता है, लेकिन इसके साथ हौसला हो तो मुकाम तक पहुंचना मुश्किल नहीं होता है।
संघर्षों भरी रही जीवन की शुरुआत:
रूमा देवी का जन्म बाड़मेर के छोटे से गांव रावतसर में 1988 में हुआ। जब चार साल की थी, तब मां साया सिर से उठ गया। आठवीं तक जैसे-तैसे शिक्षा ग्रहण करने के बाद अन्य हजारों लड़कियों की तरह उन्हें भी स्कूल से अलग दिया गया और शादी कर दी गई।
कशीदाकारी से शुरू हुई सफलता की यात्रा:
17 साल की उम्र में माँ बनने के बाद 48 घंटे में उनका बेटा मर गया। इसके बाद उन्होंने कुछ करने की ठानी। बचपन में दादी से सीखा कशीदाकारी के काम से शुरूआत की। स्वयं सहायता समूह का गठन कर कशीदाकारी कार्य शुरू किया ताकि परिवार में कुछ आमदनी हो सके।

