Thursday, February 26, 2026
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दुःख के क्षण में हृदय में एक अनुभूति

महाराष्ट्र मूकनायक रिसोड : अमर कानडे

अपने कंधों पर हिंदू और मुस्लिम झंडे लेकर अनगिनत तूफानों का सामना करने वाले शेख बाबू शेख सरदार (ठेकेदार) रविवार (13 अक्टूबर, 2024) को अंतिम सांस ली। यह बरगद का पेड़ सुबह तीन बजे गिर गया, जिससे उनका परिवार और जिले के सभी शुभचिंतक अनाथ हो गए और रिसोड शहर में एक इतिहास बनाने वाला जंजावत वक्त के पर्दे के पीछे से गुजर गए ।

अपनी अनुभूती और ओजस्वी बयानबाजी और समाज सेवा से रिसोड़ शहर को स्वाभिमान के साथ खड़े होने का मंत्र देने वाले इस तूफानी व्यक्तित्व के निधन से न केवल रिसोड़ शहर, बल्कि वाशिम जिले के समस्त लोगों को गहरा आघात पहुंचा है।

भले ही वह सीधे तौर पर राजनीति में नहीं थे, लेकिन उन्होंने अपनी पत्नी को चार बार नगरसेवक बनाकर प्राधिकार स्थापित कर और स्वाभिमान के साथ निर्भय होकर समाज का नेतृत्व कैसे करें। इतने सारे मार्गदर्शन की प्रत्यक्ष सहायता के बिना समाज में आने वाले संकटों को अनुभव के माध्यम से सामने जा सके , इसलिए अप्रत्यक्ष रूप से मजबूती से खड़े रहने वाले और हिंदू मुस्लिम एकता के रूप में क्रांतिवीर लहुजी मंडल के रेणुका माता दुर्गा मंडल इसके अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। क्रांतिवीर लहुजी मंडल का रेणुका माता दुर्गा मंडल वर्षों से चल रहा है और उस रेणुका माता घाट की परंपरा इस वर्ष भी जारी है। इस वर्ष रेणुका माता दुर्गा मंडल के 50 वर्ष पूरे हुए इस से पता चलता है कि मुस्लिम होने के बावजूद उनके मन में हिंदू धर्म के प्रति कितना सम्मान था।

                   
               
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