वरिष्ठ प्रतिनिधी मूकनायक लक्ष्मण रोकडे
ता. ०४ मै २०२४ दो दिन पहले गुरुवार रात ०८ बजे भीम जन्मभूमि स्मारक बंद होने के बाद ०९ बजे के दरम्यान स्मारक पर आंबचंदन और गंगलियाखेडी के कुछ लड़के पहुंचे और स्मारक पर सोनू खन्ना और विनोद अहिरवार से स्मारक की चाबी मांगने लगे और अध्यक्ष की साइन किया कोई कार्य विभाजन का पत्र दिखाकर बदतमीजी करने लगे, इस बीच राजेश वानखेड़े अपने भाई रवि वानखेड़े, भतीजे अविनाश वानखेड़े, आयुष वानखेड़े, मामा अरुण कुमार इंगले, फर्जी सदस्य विनोद मेघवाल, मानिकराव तायड़े और बाबासाहेब को गाली देने वाले दुर्गेश राठौर, विकास राठौर और अन्य लोगो के साथ पहुंचे और स्मारक समिति के ऑफिस का ताला तोड़ दिया।
इसके पहले भी राजेश वानखेड़े ने समिति की अलमारी से दस्तावेज गायब कर जालसाजी की है। जिसके चलते स्मारक की ऑफिस की चाबी सदस्यो के पास रहती है।
ताला तोड़ने की खबर लगते ही पूर्व उपाध्यक्ष राजेंद्र वाघमारे स्मारक पहुंचे और इन कथित लड़कों को पकड़कर महू कोतवाली थाना ले आए। बाबासाहेब आंबेडकरजी के राष्ट्रीय स्मारक पर प्रतिमाओं को नुकसान पहुंचाने, दानपेटियों को नुकसान पहुंचाने की मंशा से रात के अंधेरे में अवैध तरीके से स्मारक पर घुसने के खिलाफ पुलिस कार्यवाही की मांग की।
इस बीच इंदौर से भी एड प्रकाश निकड़े, सुनील खंडेराव, राजू कुमार अंभोरे, राहुल हिवरे एवं कुणाल वाकोड़े भी तत्काल थाने पहुंचे।
लेकिन पुलिस प्रशासन ने दबाव प्रभाव में सिर्फ आवेदन लेकर जांच की बात कही।
आवेदन देकर सभी ०६ सदस्य स्मारक पर कर्मचारियों से मिलने पहुंचे तो इतने में राजेश वानखेड़े, अपने भाई रवि वानखेड़े, भतीजे अविनाश वानखेड़े, आयुष वानखेड़े, मामा अरुण इंगले, फर्जी सदस्य विनोद मेघवाल, माणिकराव तायड़े एवं अन्य साथियों के साथ पहुंचा और रवि वानखेड़े ने स्मारक की चाबियां विनोद अहिरवार से छीन ली। राजेश वानखेड़े, रवि वानखेड़े, अविनाश वानखेड़े, आयुष वानखेड़े ने कार से उतरते ही सभी सदस्यों को मा-बहन की गालियां बकते हुए, सदस्यो को पुलिस केस में उलझाने, घर बिकवाने और जान से मारने की धमकियां दी। इनके द्वारा सदस्यों के साथ मारपीट करने की भी कोशिश की गई। पुलिस प्रशासन मेरे साथ है, सरकार मेरे साथ है मेरा कोई कुछ नही बिगाड़ सकता कहते हुए सभी को स्मारक पर नहीं दिखने की धमकियां दी।
रात के अंधेरे का फायदा उठाकर, स्मारक के केमरे की जद से बाहर हुई ये घटना इनकी गुंडागर्दी और स्मारक पर कब्ज़ा करने की मंशा जाहिर करती है।
मिलीभगत से दानराशि के लाखों करोड़ों रुपयों की हेराफेरी करने, समिति को हिसाब किताब नही देने, मनमर्जी और तानाशाही करने वाले राजेश वानखेड़े, अरुण इंगले ने अपने भाई भतीजों और फर्जी, लालची सदस्यो के साथ मिलकर उक्त घटना को अंजाम दिया।
सभी सदस्यों ने जन्मभूमि स्मारक की गरिमा को ध्यान में रखकर भवावेश में कोई प्रतिक्रिया दिए बिना जन्मभूमि स्मारक पर किसी बड़ी दुर्घटना के घटने को टाल दिया। जिससे जन्मभूमि स्मारक का नाम और खराब हो सकता था।
इस पुरे प्रकरण में अध्यक्ष भंते, उपाध्यक्ष डॉ. अनिल गजभिए की मिलीभगत है। हमने फोन लगाकर भंते को पूछा कि आप इंदौर आए है क्या तो उन्होनें मना कर दिया। जबकि इंदौर के होटल में इन्होंने फर्जी बैठक ली जिसकी सूचना बाकी १९ सदस्यो को नहीं दी और फर्जी सदस्यता के साथ कोरम पूरा करने का षडयंत्र किया।
सभी से निवेदन है कि जन्मभूमि स्मारक पर बाबासाहेब अम्बेडकर को गाली देने वाले, उनकी विचाधारा से खिलवाड़ करने वालो का कब्जा होने, जन्मभूमि की छवि को धूमिल होने से रोकने के लिए सहयोग करे। ऐसी कमिटी के द्वारा गूहार लगाई गई है!

