मुकनायक प्रतिनिधि: भीम प्रकाश बौद्ध
जागृत आदिवासी दलित संगठन के नेतृत्व में देशव्यापी किसान आंदोलन में शामिल होते हुए पाटी में आदिवासी महिला पुरुषों द्वारा रैली एवं विरोध प्रदर्शन किया गया। प्रधानमंत्री द्वारा फसलों की लागत की डेढ़ गुना दाम पर कानूनी गारंटी देने, किसानों की आय दोगुना करने की वादा खिलाफी के ख़िलाफ़ देशभर में हो रहे आंदोलन में शामिल होते हुए, फसलों की लागत पर डेढ़ गुना दाम तय करने की कानूनी गारंटी की मांग उठाई गई। वन अधिकार कानून के क्रियान्वयन के साथ पाटी क्षेत्र में अस्पतालों में नियुक्तियों की कमी, नरेगा और राशन प्राप्त करने में आ रही परेशानियों को लेकर जागृत आदिवासी दलित संगठन ने गुरुवार को पाटी में रैली कर तहसील कार्यालय में सभा का आयोजन किया। आदिवासियों के आंदोलन में आदिवासी छात्र संगठन से प्रकाश बंदोड, सामाजिक कार्यकर्ता पोरलाल खरते भी शामिल हुए ।
फसलों पर बढ़ता खर्च, बढ़ती महंगाई के और ऊपर से फसलों का पूरा भाव न होने के कारण किसानों पर कर्जा बढ़ता जा रहा है और आदिवासी किसान मजदूर बन कर पलायन के लिए मजबूर हो रहे हैं। गांव में रोजगार खोलने की जगह, सरकार रोजगार गारंटी में मजदूरों की पेमेंट नहीं कर रही है! बड़वानी में रोजगार गारंटी में मजदूरों की 850 करोड़ की राशि अभी तक लंबित है – मजदूरों से बिना पेमेंट के काम कराया जा रहा है, मोबाइल एटेंडेंस और आधार – डीबीटी के नाम पर आदिवासियों को काग़ज के पीछे दौड़ाया जा रहा है, इससे साफ है कि सरकार आदिवासियों को कंपनियों और सेठों के लिए सस्ते मजदूर ही बनाना चाहती हैं।
वन अधिकार कानून के पालन का मांग उठाते हुए आदिवासियों ने कहा – जल जंगल जमीन के लिए जो भीमा नायक, खाज्या नायक लड़े थे, आज उनके ही बच्चों को “पिछड़े वर्ग” में डाल कर वन अधिकार पट्टे नहीं दिए जा रहे हैं – इससे ज्यादा शर्मनाक क्या हो सकता है?
शिक्षा इतनी महंगी हो रही है की हमें कर्ज़ लेकर बच्चों को पढ़ाना पड़ रहा है – स्कूलों को मजबूत करने की जगह, सीएम राईज़ के नाम पर सरकार केवल 9200 स्कूलों की जिम्मेदारी ले रही है – 10-15 किलोमीटर में एक स्कूल होगा, और बाकी स्कूलों को अपने आप बंद हो जाएंगे! आज मध्य प्रदेश में एक लाख पद रिक्त है, 27 हजार स्कूलों में बिजली नहीं है – लेकिन सरकार हमारे शिक्षा के संवैधानिक अधिकारों को खत्म किया जा रहा है!
ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य व्यवस्था के मुद्दे उठाते हुए पाटी अस्पताल में प्रसव भवन के निर्माण की मांग उठाई गई, और पाटी के विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों में ANM एवं CHO की नियुक्ति की मांग भी उठाई गई । राशन के वितरण में भी मोबाइल अनिवार्य करने के आदेश आदिवासियों के खाने के संविधानिक अधिकार का उल्लंघन है – राशन आदिवासियों का अधिकार है, किसी सरकार की भूख नहीं! पेट्रोल-डीजल, बिजली, रेल में सफर से लेकर खाने के तेल तक – बाज़ार में मिलने वाली हर चीज़ का दाम बढ़ता जा रहा है, लेकिन अपनी मेहनत से देश को चलाने वाले किसान मजदूरों की कमाई वैसे के वैसी ही है। 9 सालों में केंद्र सरकार ने कंपनियों का 14 लाख करोड़ रुपए कर्जा माफ कर दिया, लेकिन ज़िंदगी भर काम करने के बाद, बुढ़ापे में इज्ज़त से जीने के लिए पेंशन देने के लिए सरकार के पास पैसे नहीं होते!
देश भर में किसान मज़दूरों के आंदोलन के अंतर्गत फ़सलों की लागत पर डेढ़ गुना भाव का सरकारी रेट तय कर उसकी कानूनी गारंटी दी जाने, रोजगार गारंटी में कम से कम 200 दिन काम और 800 रुपए एक दिन की मजदूरी, और मजदूरों को 26000 रुपए महीने की न्यूनतम मजदूरी की मांग की गई। वन अधिकार कानून का क्रियान्वयन और बिना ग्राम सभा के अनुमती के जंगलों को कंपनियों को हवाले करने वाले वन संरक्षण कानून 2023 और उसके नियमों को खारिज करने की मांग करते हुए प्रधान मंत्री को ज्ञापन सौंपा गया।
बड़वानी में रोजगार गारंटी में काम कर चुके मजदूरों की 850 करोड़ की बकाया राशि का तुरंत भुगतान करने, बड़वानी के वन अधिकार दावों पर नियमानुसार कार्यवाही करने और पाटी क्षेत्र के अस्पतालों में नियुक्तियों की मांग उठाते हुए कलेक्टर के नाम तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा और उपस्थित अधिकारियों से अपने मुद्दों तक सवाल जवाब किया है। मांगों पर कार्यवाही न होने पर और भी बड़ा आंदोलन करने की चेतावनी दी।

