Thursday, February 26, 2026
Homeअजमेर*बाबा साहेब को पूजने की नहीं, पढ़ने और समझने की जरूरत है*

*बाबा साहेब को पूजने की नहीं, पढ़ने और समझने की जरूरत है*

जिनको बाबासाहेब डॉक्टर आंबेडकर का सपना पूरा करना है, वो उनके नाम का जयघोष नहीं करते। बाबासाहेब डॉक्टर आंबेडकर व्यक्तिपूजा के विरोधी थे, वो कहते थे की मेरी जय जयकार करने के बदले अपनी जान की बाजी लगा कर मेरा कार्य पूरा करो लेकिन जिन लोगों को उनकी बात समझ में नहीं आई या समझ कर भी अपने को बचाने के लिए वह उनके नाम का जय जय कार करते रहते हैं। बुद्ध ने कहा था कि मेरी मूर्ति मत बनाइए, लेकिन हम देखते हैं कि, दुनिया में जितने बुद्ध की मूर्तियां हैं उतनी मूर्तियां और किसी की नहीं है। मूर्तियां बिठाने में उनके विरोधी लोग तो है ही, उनको मानने वाले लोग भी उसमें शामिल है। क्योंकि जैसे ही हम किसी की पूजा करना शुरू करते हैं, उनको हम भगवान बना देते हैं और जैसे ही कोई भगवान बनता है फिर उस व्यक्ति की मनुष्य जाति के लिए कोई उपयोगिता नहीं रहती। आज बुद्ध और बाबा साहब डॉ अंबेडकर को उनके अनुयायियों ने भगवान बनाकर मनुष्य जाति के लिए उनकी उपयोगिता करीब-करीब खत्म कर दी है। हम देखते हैं कि गांव और कस्बों में लोग जब आपस में मिलते हैं तब वह एक दूसरों से राम राम कहते हैं। क्योंकि, राम को वह अपना भगवान मानते हैं। वैसे ही आज बाबा साहब डॉक्टर

बाबा साहेब को पूजने की नहीं, पढ़ने की जरूरत
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अंबेडकर को मानने वाले लोग जब आपस में मिलते हैं तब वह एक दूसरों से जय भीम कहते हैं। मुझे ऐसा लगता है कि जो लोग आपस में मिलने के बाद राम राम और जय भीम कहते हैं उनमें कोई भेद या अंतर दिखाई नहीं देता। राम राम कहने वाले लोग आपस में मिलने के बाद रामराम इसलिए कहते हैं कि राम उनका भगवान है। जो लोग आपस में मिलने के बाद जब जय भीम कहते हैं तो सवाल यह

दिखाई देगी। किसी का एहसान जताने के लिए क्या उनका बार-बार नाम लेने से, उनका एहसान पूरा कर पाएंगे? मैं समझता हूं वह तो एक दिखावा, एक ड्रामेबाजी होगी। डॉक्टर अंबेडकर ने जो समाज के लिए कार्य किया और उनके अनुयायियों से उन्होंने जो कार्य की अपेक्षा की, वही कार्य करना उनका नाम लेने से बेहतर होगा। बाबासाहेब डॉक्टर अंबेडकर को व्यक्ति पूजा इसलिए मान्य नहीं थी कि, वह एक व्यक्ति को बड़ा तो बनाती है लेकिन बहुतांश समाज को उस व्यक्ति का भक्त बनाती है। इससे समाज का विकास रुक जाता है, क्योंकि आदमी फिर सोचना बंद कर देता है और लोकतंत्र के लिए यह बात बड़ी खतरनाक है। व्यक्ति पूजा ब्राह्मण बनियों के लिए ठीक हो सकती है, क्योंकि उनका समाज जागरूक है। इसलिए उनकी जनसंख्या कम होते हुए भी भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में वह आज बहुजनों पर राज कर रहे हैं। यह एक व्यक्ति पूजा का ही परिणाम है। अपने देश में इसी बात के लिए प्रथम गांधीजी को राष्ट्रपिता बनाकर बहुत बड़ा तो बना दिया लेकिन लाखों

पैदा होता है कि क्या डॉक्टर अंबेडकर उनके भगवान थे? इसका जवाब वह भगवान नहीं थे ऐसा ही होगा। फिर उनका जय जयकार क्यों? बाबा साहब डॉक्टर अंबेडकर का अहसान मानना, उनका आदर व्यक्त करना, यह बात ठीक है, लेकिन वह दिखावे की बात नहीं हो सकती, वह तो अपनी अपनी श्रद्धा की बात है, वह तो अंदर की बात है, वह बात तो आपके कार्य से, आपके बर्ताव से

और आगे भी, अगर परिस्थिति ना बदली तो, यही सिलसिला चलता रहेगा। इसी कारण लोकतांत्रिक देश में घरानेशाही भी चल गई और नेहरू गांधी परिवार से ही तीन तीन लोग देश के प्रधानमंत्री बनाए गए। यह बात व्यक्ति पूजा का ही एक परिणाम था। कोई व्यक्ति अपने समाज को अज्ञानी रखकर कभी बड़ा नहीं बन सकता। बाबा साहब डॉ अंबेडकर कहते थे कि मेरे खुद के और देशहित को लेकर कोई विवाद पैदा होता है तो मैं देश हित को महत्व दूंगा। लेकिन अगर मेरे समाज और देश हित को लेकर कोई विवाद पैदा होता है, तो मैं मेरे समाज के हित को महत्व दूंगा। डॉक्टर अंबेडकर अपने से ज्यादा देश को महत्व देते थे। क्योंकि हमारे विरोधी भारत को ना अपना देश मानते हैं, ना देश के संविधान को वह अपना मानते हैं। इसलिए देश हमारा होने के कारण देश के सारे बहुजन अपनी जाति, धर्म और पार्टी को अलग रखकर देश के संविधान में दर्ज समानता, स्वतंत्रता, भाईचारा और न्याय

इन मानवीय मूल्यों पर एकजुट हो सकते हैं।

करोड़ों लोगों को अंधा बना कर रख दिया

हरीराम जाट
नसीराबाद, अजमेर,
9461376979

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