Thursday, February 26, 2026
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मैत्रीय भाव से ही मानव का जीवन सुखमय व्यतीत हो सकता है…पूज्य भदंत धम्म शिखर जी

(बालाघाट जिला बौद्ध संघ बालाघाट एव प्रज्ञा दीप बुद्ध विहार समिती कटंगी के सयुक्त तत्वाधान में ध्यान साधना सद्धम्म प्रशिक्षण 8दिवसीय शिविर संपन्न ) कटंगी (बालाघाट)बालाघाट जिला बौद्ध संघ बालाघाट”तहसील शाखा कटंगी, नगर बौद्ध संघ कटंगी एवं प्रज्ञा दीप बुद्ध विहार समिति के संयुक्त तत्वाधान में प्रज्ञा दीप बुद्ध विहार कटंगी में दिनांक 22 अगस्त २०२३ से 29 अगस्त २०२३ तक आठ दिवसीय ध्यान साधना सद्धम्म प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया! ध्यान साधना सद्धम्म प्रशिक्षण शिविर कटंगी में पूज्य भदंत धम्म शिखर जी बालाघाट द्वारा बौद्ध उपासक उपासिकाओं को तथागत बुद्ध के बुद्ध धम्म को विस्तार पूर्वक बताए तथा तथागत बुद्ध के बुद्ध धम्म को देवनामप्रिय महान सम्राट अशोक व आधुनिक बुद्ध परम पूज्य डॉ बाबासाहेब अंबेडकर जी के द्धारा बुद्ध धम्म के उत्थान के संदर्भ में अवगत कराए पूज्य भदंत धम्म शिखर जी ने प्रशिक्षण के दौरान उपासक उपासिकाओं को बताया कि तथागत बुद्ध धम्म में बुद्ध शरणम गच्छामि बुद्ध का अर्थ बुद्धत्व – धम्म शरणम गच्छामि सम्मार्ग “संघम शरणम गच्छामि अर्थात तथागत बुद्ध का भिक्षु संघ के बारे में विस्तार से अवगत कराया और बताए की तथागत बुद्ध को संबोधि प्राप्त होने के उपरांत संसार के चार आर्य सत्य का साक्षात्कार किया दु:ख आर्य सत्य है ,मनुष्य को जीवन में कभी न कभी दु:ख से सामना करना पड़ेगा दुःख आने का कोई न कोई का कारण निश्चित होता है मानव जीवन मे जो दुःख आते है उन दु:खों का निवारण करने के उपाय बताए दुःख का उपसमन के संबध में तथागत बुद्ध के 8 अष्टांगिक मार्ग है। तथागत बुद्ध के बनाए 8अष्टांगिक मार्ग को सम्यक रूप से जीवन में अंगीकार करने से मनुष्य दु:खों से मुक्त होकर सुखी रह सकता है। सम्यक दृष्टि” सम्यक संकल्प” सम्यक वाचा “सम्यक क्रमांर्त” सम्यक आजीविका “सम्यक व्यायाम” सम्यक् स्मृति “सम्यक समाधि “पूज्य भदंत धम्म शिखर जी द्वारा तथागत बुद्ध के बौद्ध धम्म सिद्धांतों में 10 पारिमिताओं का विस्तार पूर्वक बताते हुए कहा की मनुष्य को प्राणियों के साथ अच्छे से आचरण अवश्य करना चाहिए पारिमिताओ शील ” दान “अपेक्षा “नैष्कर्म” वीर्य “शांति” अधिष्ठान “करुणा “मैत्री “सभी पारिमिताओ का पालन प्रत्येक व्यक्ति को करना चाहिए पारिमिताओ के इन गुणों को अपनी पूरी सामर्थ्य के साथ व्यवहार में अपनाने से ही मानव का उत्थान सम्भव है ।पूज्य भदंत धम्म शिखर जी ने उपासक उपासकों को अष्टशील के महत्व को विस्तार पूर्वक समझते हुए बताया प्राणी हिंसा से विरत रहना “झूठ बोलने से विरत रहना “चोरी करने से विरत रहना “काम मिथ्याचार से विरत रहना “सभी प्रकार के मादक द्रव्यो को सेवन करने से विरत रहना “विकाल भोजन से विरत रहना “विलासिता पूर्ण महासियासन से विरत रहना। “समस्त बौद्ध जनों से आव्हान किए की स्वयं को नैतिकता एवं ऊंचाइयों पर पहुंचने के लिए पंचशील ,अष्टशील ,अष्टांगिक मार्ग 10 पारिमीताएं को अंगीकार करने से मानव का हित सम्भव है ये सभी पवित्र जीवन का आधार स्तंभ है ये तथागत बुद्ध का अनुपम मार्ग है पूज्य भदंत ने बताया की मानव जीवन भर मानव से ही सबसे ज्यादा बैर रखता है ।भंते जी बताया कि राग के समान आग नही “द्ववेश के समान भूत नही मोह के समान जाल नही तृष्णा के समान नदी नही इसलिए व्यक्ति का बैर – बैर से शांत नहीं होता अबैर से शांत होता है अर्थात मैत्री भाव से मानव का जीवन सुखमय संभव है। तमाम उपासक उपासिकाओ से कहा की मानव को मानव के साथ सदैव मैत्रीय पूर्ण व्यवहार सदैव बनाए रखने से कल्याण संभव है। कार्यक्रम में समापन दिवस पर पूज्य भदंत धम्म शिखर जी अधिवक्ता संजय खोबरागडे जिला अध्यक्ष बालाघाट जिला बौद्ध संघ बालाघाट “महेन्द्र हिरकने तहसील अध्यक्ष कटंगी डी .डी .गजभिए नगर अध्यक्ष कटंगी , डाक्टर अनिल हिरकने, “महिला मंडल अध्यक्षा आयुष्मांति मंजू दिनेश ऊके के नेतृत्व में विशाल धम्म रैली निकाली गई। तदुपरांत लगभग 150 लोगों को सम्मान पत्र प्रदान किये गये । कार्यक्रम के समापन दिवस समारोह के संबद्ध अधिवक्ता संजय खोबरागडे जिला अध्यक्ष बालाघाट जिला बौद्ध संघ बालाघाट ने सभी बौद्ध उपासक उपासिकाओ को बताया की बालाघाट जिला बौद्ध संघ बालाघाट के इतिहास में पहली मर्तबा व कटंगी की सरजमी पर प्रथम बार 8 दिवसीय ध्यान साधना सद्धम्म प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया शिविर में शरीक तमाम लोगों का विनम्रता पूर्वक साधुवाद दिया और तमाम लोगों से आव्हान किया की बुद्ध अम्बेडकर मिशन को अग्रसर करने के लिए कटिबद्ध होकर प्रतिज्ञा लेनी चाहिए के एल तिरपुड़े जी ने कहा की भारत को प्रबुद्ध भारत बनाने की निहायत आवश्यकता है सचिन बौद्ध ने कहा की बुद्ध धम्म मानव जीवन का आधार स्तंभ है रवि पटले ने कहा कि शिविर की सफलता तब ही साबित होगी जब शिविर में बताए अनुसार विचारो को अंगीकार करे कार्यक्रम का सफल संचालन आयुष्मति निरुपमा राकेश वारके ने किया तथा आभार प्रदर्शन डी डी गजभीय ने किया कार्यक्रम को सफल बनाने हेतू अधिवक्ता संजय खोबरागडे जिला अध्यक्ष बालाघाट जिला बौद्ध संघ बालाघाट ,महेंद्र हिरकने तहसील अध्यक्ष कटंगी ,डी डी गजभिए नगर अध्यक्ष कटंगी, आयुष्मती मंजू दिनेश ऊके अध्यक्षा प्रज्ञा दीप महिला मंडल कटंगी ,डाक्टर अनिल हिरकने रमेश गेडाम ,राकेश वारके, वरिष्ठ सामाजिक धार्मिक कार्यकर्ता भोजराज वासानिक ,रामचंद मेश्राम, बालाघाट जिला बौद्ध संघ तहसील शाखा तिरोड़ी तहसील अध्यक्ष दलित मेश्राम , कुमार हूमनेकर, , डी. के. ऊके, यूवराज मंडाले, पूनम मंडाले, विजय गड़पाल संजय कोल्हे,पी. आर. डोंगरे,विजय गड़पाल,हर्ष रायकर, किशोर नगरधने, अधिवक्ता यूनित खोबरागड़े,एल .डी .हिरकने, हर्ष हिरकने, पूनम मंडाले, , विनोद गड़पाल, किशोर मेश्राम, हंसराज राउत,, योगेश चौरे, एन. एल मेश्राम ,सुरेश गणवीर, संजय शेंडे ,कपिल मेश्राम (पार्षद ) अशोक चिचघेड़े योगेश चौरे अरविन्द दरवडे हर्ष रायकर , ऋषभ हिरकने मोहित मेश्राम तुषार रायकर आशीष रंगारे रूपेश बोरकर विनय साखरे राहुल मसूरकर विमल भालाधारे,मोहित मेश्राम, परमानंद डोंगरे, अनंत गड़पाल , शुभम मेश्राम ‘ सारस्वत मेश्राम ‘ हिमांशु हिरकने ‘ मन्यक वारके साहिल राउत’ सतीश गड़पाल ‘ सम्यक कोल्हे ‘ चेतना मसूरकर, पुष्पा गणवीर, पुष्पा गेडाम, आशा हूमनेकर, किरण भालाधारे ,भाविका मेश्राम , सरिता गड़पाल, रीता मेश्राम, अरुणा गड़पाल, पंचशिला हुमनेकर ,पुष्पलता शेंडे, सलोनी गडपाल, अंजू गड़पाल, उषा मसूरकर, रश्मी मेश्राम, साधना मंडाले, हेमलता मासूरकर, दीपा मासुरकर, अनुसया मासूरकर, प्रतिमा खोबरागड़े, रेखा बोरकर, वीणा गजभिए, वंदना खोबरागड़े, रंजना खोबरागड़े, प्रीति खोबरागड़े, आयुष खोबरागड़े, तुरसा गड़पाल, , सुलोचना मंडाले, उषा खोबरागड़े, गोपिका गड़पाल, सेवन दुपारे, प्रज्ञा गजभिए, विद्या मेश्राम, कंचन मेश्राम, रीता राउत, मनीषा कोल्हे , रीमा खोबरागड़े, माही मेश्राम, कुसुम सेलारे, पूजा गड़पा संगीता चौरे एकता भिवगड़े, रक्षा ऊके, सुमीक्षा खोबरागड़े, अवनी गड़पाल, रुचि खोबरागड़े, मायरा खोबरागड़े, ,अगुरकला गेडाम, प्रतिमा खोबरागड़े, मोनिका हिरकने, लीना हिरकने, नीता हिरकने, सारिका हिरकने, महक हिरकने, आस्था हिरकने, कुसुम सेलांरे’ साक्षी राउत, अनुसया मसूरकर, योजना बरमाटे, दिव्या बरमाटे, रीता हिरकने, उषा हिरकने, अनिता हिरकने, नम्रता मेश्राम, निलिन लांझेवार, विद्या मेश्राम, पुष्पलता शेंडे,अनिता मासूरकर, दीक्षा मासूरकर, श्रेया मेश्राम, सिखा मेश्राम, प्रिंश शेंदे, निमा हिरकने, अंजू गड़पाल, सरिता गड़पाल, सुलोचना मंडाले, वैशाली गड़पाल, प्रिया गड़पाल, पूजा गड़पाल, लुषा हिरकने, लता ऊके, काव्या मेश्राम, श्रुति मेश्राम, रोशनी मेश्राम, मासूम खोबरागड़े, आयुष खोबरागड़े, सानिध्य कोल्हे, सोम्य मसूरकर, मायरा खोबरागड़े, संघमित्रा गड़पाल, सुभाश्री गेडाम मंजू चिचखेडे, ,श्रुति उके, शौर्य मेश्राम, तमन्ना मेंश्राम,प्रज्ञा गनवीर,वानिश गेडाम, अस्तित्व मासुरकर ,अनुभव मासुरकर,नम्य मेश्राम इत्यादि सहित सैकड़ों लोग उपस्थिति थे।

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