मूकनायक/ दुष्यंत सुरेश सांखरे रायपुर/छत्तीसगढ़
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की परीक्षा धांधली के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हाल ही में हुए लाठीचार्ज के दौरान दिल्ली से एक ऐसी विचलित करने वाली घटना सामने आई है, जिसने कानून व्यवस्था और महिला सुरक्षा के बड़े-बड़े दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो ने पुलिस विभाग की संवेदनशीलता को पूरी तरह कटघरे में खड़ा कर दिया है।*वीडियो में कैद हुई अमानवीय क्रूरता*जंतर-मंतर पर हुए इस प्रदर्शन के दौरान का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें पुलिसिया बर्बरता की सारी हदें पार होती दिख रही हैं। वीडियो और चश्मदीदों के दावों के अनुसार, प्रदर्शन स्थल पर मची भगदड़ के बीच एक छात्रा पुलिस घेरे के पास अकेली फंस गई। इसी दौरान एक पुरुष पुलिसकर्मी ने पीछे से आकर उस निहत्थी छात्रा के साथ बेहद आपत्तिजनक और अमानवीय तरीके से बल प्रयोग किया। क्रूरता की हद तो तब पार हो गई जब इस गंभीर और शर्मनाक हरकत को अंजाम देते हुए उस पुलिसकर्मी के चेहरे पर रत्ती भर भी पछतावा नहीं था, बल्कि वह संवेदनहीनता से हंसता हुआ दिखाई दे रहा था। *कानून और मानवाधिकारों का सरेआम उल्लंघन*यह घटना सीधे तौर पर मानवाधिकारों और सुप्रीम कोर्ट के उन दिशानिर्देशों का उल्लंघन है, जो स्पष्ट रूप से कहते हैं कि किसी भी महिला प्रदर्शनकारी या आरोपी को संभालने की जिम्मेदारी केवल और केवल महिला पुलिसकर्मियों की होती है। किसी पुरुष पुलिसकर्मी द्वारा एक युवती के साथ इस तरह का बर्बर और अमर्यादित व्यवहार करना न केवल कानूनी रूप से अपराध है, बल्कि यह कानून के रखवालों की मानसिकता पर भी गंभीर सवाल उठाता है।*देश भर के युवाओं और समाज में भारी गुस्सा* इस शर्मनाक वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया से लेकर ज़मीन तक लोगों का गुस्सा उबल पड़ा है। छात्र संगठनों, महिला अधिकार कार्यकर्ताओं और आम जनता का कहना है कि जो हाथ कल देश के मरीजों की सेवा के लिए डॉक्टर बनने का सपना देख रहे थे, उन्हें दिल्ली की सड़कों पर इस तरह प्रताड़ित और अपमानित किया जाना बेहद निंदनीय है।*मूकनायक का सवाल: कब होगी बर्खास्तगी?*चौतरफा दबाव के बाद हालांकि पुलिस प्रशासन के उच्च अधिकारियों का कहना है कि वे वीडियो की सत्यता की जांच कर रहे हैं, लेकिन सवाल यह है कि वीडियो में साफ दिख रही इस अमानवीय हरकत और क्रूर हंसी के बाद भी जिम्मेदार पुलिसकर्मी को अब तक सस्पेंड या बर्खास्त क्यों नहीं किया गया? क्या अपनी वाजिब मांगों के लिए सड़क पर उतरने वाली देश की बेटियों को न्याय मांगने के बदले खाकी की ऐसी शर्मनाक प्रताड़ना सहनी पड़ेगी?
*लेखक*:दुष्यंत सुरेश सांखरे रायपुर जिला ब्यूरो चीफ (रायपुर, छत्तीसगढ़)मूकनायक मीडिया

