Sunday, July 26, 2026
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‍आज़ादी के 79 साल बाद भी संवैधानिक अधिकारों से वंचित बाडमेर की मेघवाल बाहुल्य ढाणियाँ

मूकनायक/राम लाल यादव संपादक राजस्थान
बांसवाड़ा/ राजस्थान

आज हम आपको ले चल रहे हैं बाड़मेर ज़िले की सियाणी-खेजड़िया नाड़ी पंचायत सहित रामसर क्षेत्र की उन मेघवाल बाहुल्य ढाणियों में, जहाँ विकास के दावों और वास्तविकता के बीच 79 साल की दूरी दिखाई देती है।

यहाँ हजारों मेघवाल समाज के लोग रहते हैं। कुछ अन्य समाजे भी है सवाल यह है कि क्या संविधान द्वारा प्रदत्त समानता, शिक्षा और मौलिक अधिकार इन नागरिकों तक भी पहुँच रहे हैं?
ग्राउंड रिपोर्ट

कैमरा इन मासूम चेहरों पर ज़ूम कीजिए…
ये बच्चे रोज़ 2-3 किलोमीटर (प्राथमिक) और 6-7 किलोमीटर (माध्यमिक) पैदल चलकर स्कूल पहुँचते हैं — यानी प्रतिदिन 12-14 किलोमीटर।

न्यायसंगत सवाल:
संविधान के अनुच्छेद 21A के तहत शिक्षा का अधिकार इन बच्चों को क्यों नहीं मिल पा रहा? क्या इतनी छोटी उम्र में इतनी दूरी तय करना इन बच्चों का मौलिक अधिकार है या मजबूरी?
इसी वजह से पाँचवीं के बाद कई बालिकाएँ और बच्चे पढ़ाई छोड़ देते हैं।
सड़क, परिवहन और पेयजल की स्थिति
खेजड़िया से आंबेडकर नगर तक आज भी कच्चा रास्ता। कई ढाणियों में पक्की सड़क नहीं। बरसात में कीचड़ और गर्मी में धूल। न बस, न स्कूल वाहन।

पेयजल के लिए लोग वर्षा का पानी संग्रहित करते हैं, समाप्त होने पर निजी टैंकर खरीदते हैं।
समाज की कोशिश

बाड़मेर के कई भामाशाहों और समाज ने स्वयं बच्चों को गोद लिया, छात्रावास बनाए और शिक्षा का बोझ उठाया, लेकिन सरकारी सहयोग ज़मीन पर नगण्य है।
सरकार, CM, शिक्षा मंत्री, सांसद एवं विधायकों से न्यायसंगत सवाल

अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 15 (भेदभाव निषेध) के बावजूद इस मेघवाल (अनुसूचित जाति) बाहुल्य क्षेत्र को विकास की मुख्यधारा से दूर क्यों रखा गया है? क्या यह संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप है?

अनुच्छेद 21A के तहत निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार इन ढाणियों के बच्चों तक पहुँचाने के लिए शिक्षा विभाग ने क्या ठोस कदम उठाए हैं? माध्यमिक विद्यालय कब खोला जाएगा?

अनुच्छेद 46 के अनुसार अनुसूचित जातियों के शैक्षिक और आर्थिक हितों को बढ़ावा देने की राज्य की जिम्मेदारी है। फिर इन बालिकाओं की शिक्षा दूरी और परिवहन की कमी के कारण क्यों बाधित हो रही है? स्कूल बस सुविधा कब उपलब्ध होगी?

पेयजल को मौलिक अधिकार (अनुच्छेद 21) मानते हुए इन ढाणियों में सुरक्षित पेयजल योजना कब लागू होगी? निजी टैंकरों पर निर्भरता कब खत्म होगी?

लोक निर्माण विभाग के अंतर्गत खेजड़िया-आंबेडकर नगर सहित सभी ढाणियों को पक्की सड़क से जोड़ने का कार्य कब पूरा होगा?

केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं (समग्र शिक्षा अभियान, PMAY, Jal Jeevan Mission, PMGSY आदि) का लाभ इस क्षेत्र तक पहुँचने में इतनी देरी क्यों हो रही है?

जब स्थानीय भामाशाह और समाज स्वयं शिक्षा के लिए छात्रावास चला रहे हैं, तो सरकारी एजेंसियों का सहयोग क्यों नगण्य है? क्या यह सामाजिक न्याय की भावना के विरुद्ध नहीं है?

सांसद महोदय और स्थानीय विधायक महोदय — क्या आपने इन ढाणियों का निरीक्षण किया है? इन क्षेत्रों के लिए विशेष विकास पैकेज की मांग कब की जाएगी?

क्या इस मेघवाल बाहुल्य क्षेत्र को पिछड़े क्षेत्र घोषित कर विशेष पैकेज देने पर विचार किया जाएगा, ताकि संवैधानिक दायित्वों का पालन हो सके?

माननीय मुख्यमंत्री महोदय जी —
क्या इन हजारों बच्चों और परिवारों को भी “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास” का हक मिलेगा? या फिर यह क्षेत्र विकास की प्राथरिकता सूची में अंतिम पायदान पर ही रहेगा? मूकनायक अपिल करता है तमान विभागो से क्षेत्र की ग्राउण्ड रिपोर्ट मंगवाकर विकास की मुख्य धारा मे क्षेत्र को प्राथमिकता दे ।
समापन

विकास केवल शहरों की चमक या आंकड़ों से नहीं मापा जाता। विकास तब सच्चा माना जाएगा जब किसी ढाणी का बच्चा भी बिना किसी कठिनाई के स्कूल पहुँच सके, हर घर तक पक्की सड़क हो, हर परिवार को स्वच्छ पेयजल मिले और किसी बेटी की पढ़ाई दूरी की वजह से न रुके।
यह रिपोर्ट किसी के विरोध में नहीं, बल्कि संवैधानिक न्याय और सामाजिक समानता की मांग है।
मूकनायक राजस्थान के हर अंतिम वंचीत व्यक्ति और क्षेत्र की जमीनी हकीकत की  ग्राउण्ड रिपोर्ट और आवाज सत्ता तक पहुचाने के लिए प्रतिबद्ध है । सवाल उठाता रहेगा ।
सवाल जारी रहेंगे… देखते रहे मूकनायक न्यूज ।
क्योंकि लोकतंत्र में न्याय की मांग सबसे बड़ी ताकत है।

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