मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
✍️✍️
डर एक ऐसा कोहरा है जो आगे का रास्ता रोक देता है। जैसे ही साहस की धूप इस कोहरे को हटाती है, सफलता और शांति का मार्ग साफ दिखाई देने लगता है। वास्तविक सफलता धन या पद हासिल करना नहीं, बल्कि मन के हर डर को जीतकर पूरी आज़ादी के साथ जीना है। मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु कोई बाहरी परिस्थिति नहीं, बल्कि उसके अपने मन का डर है। असफलता का भय, भविष्य की चिंता और ‘लोग क्या कहेंगे’ का संकोच हमें एक अदृश्य पिंजरे में कैद कर देता है । इस मानसिक गुलामी में व्यक्ति अपनी पूरी क्षमता का उपयोग कभी नहीं कर पाता।
डर के बिना इंसान गलतियों को विफलता नहीं बल्कि सीखने का एक अवसर मानता है। यही दृष्टिकोण उसे अंततः सफल बनाता है। भयमुक्त व्यक्ति दूसरों के दबाव में नहीं, बल्कि अपने विवेक के आधार पर सही और सटीक निर्णय लेता है । डर हमेशा भविष्य की अनिश्चितता से पैदा होता है। डर के समाप्त होते ही मन वर्तमान में जीना सीखता है, जिससे मानसिक तनाव का अंत होता है। डर एक ऐसा कोहरा है, जो आगे का रास्ता रोक देता है। जैसे ही साहस की धूप इस कोहरे को हटाती है, सफलता और शांति का मार्ग साफ दिखाई देने लगता है। वास्तविक सफलता धन या पद हासिल करना नहीं, बल्कि मन के हर डर को जीतकर पूरी आज़ादी के साथ जीना है।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

