मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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सत्य बोलना आसान हो सकता है, लेकिन सत्य पर अडिग रहना कठिन है। कठिन परिस्थितियों में अक्सर झूठ का सहारा लेना आसान और आकर्षक लगता है, लेकिन वह सफलता क्षणिक होती है। जो व्यक्ति सत्य के मार्ग पर चलता है, उसे किसी का भय नहीं होता। उसकी अंतरात्मा शांत और निर्भीक होती है। इतिहास गवाह है कि असत्य के महल चाहे कितने भी ऊंचे क्यों ना हों, अंततः सत्य की एक छोटी सी लौ उन्हें ढहा देती है।
कठिन समय वास्तव में हमारी योग्यता और चरित्र की परीक्षा है। यदि हम यहां हार मानकर असत्य का मार्ग चुन लें, तो हम अपनी नैतिकता खो देते हैं। सत्य थोड़ा परेशान जरूर हो सकता है, लेकिन वह कभी पराजित नहीं होता। ‘सत्यमेव जयते’ का उद्घोष हमें यही प्रेरणा देता है । हमें याद रखना चाहिए कि “वक्त बुरा हो सकता है, परंतु सत्य और धैर्य की शक्ति उसे बदलने की क्षमता रखती है।” इसलिए, परिस्थितियाँ चाहे कितनी भी प्रतिकूल क्यों ना हों, सत्य की राह पर चलते रहें और धैर्य के साथ सही समय की प्रतीक्षा करें। सफलता आपके कदम अवश्य चूमेगी।
बिरदीचंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

