14 अप्रैल 1891 में जन्म हुआ था भीमराव जी का,
राम जी सकपाल और भीमाबाई नाम था उनके माता-पिता का।
बचपन से मेंधावी था,, छुआछूत को झेल गया,
मात पिता के सपने को उसने साकार कर दिया।
घर की हालत खराब थी, बड़ौदा के राजा ने सहारा दिया,
भारत में करके पढ़ाई फिर इंग्लैंड में चला गया।
पढ़ा संविधान हर देश का, गहनता से अध्ययन किया,।
अपने देश में आकर अच्छी बातों पर अमल किया।
1947 में जब भारत आजाद हुआ, भीम को कानून मंत्री बना दिया।
भीमराव अंबेडकर ने फिर भारत का संविधान लिख दिया।
विकासशील हो भारत हमारा ,
योजना ऐसी बना गया।
अधिकार और कर्तव्य बताएं,
नर- नारी को समानता का अधिकार दिया।
नारी के पढ़ने से दो घर सुधरते नारी को पढ़ने का अधिकार दिया।
मां बच्चे को पालती है, मातृत्व अवकाश का प्रावधान किया।
सबको शिक्षा मिले समान रूप से, हर किसी को पढ़ने का अधिकार दिया।
1990 में भारत सरकार ने भीमराव जी को भारत रत्न से विभूषित किया।
14 अप्रैल को जन्मदिन भीमराव का, पूरे भारत ने उनको याद किया।
भूल सकेंगे ना तेरा उपकार भीमराव, तूने देश को आगे बढ़ने का संदेश दिया।
विकासशील भारत को गति देकर, आपने,विकसित होने को अग्रसर किया।
शत-शत नमन है दुर्गा का भीमराव को, आपने सदा ही मार्गदर्शन किया।
बनी शिक्षिका मैं भी आपके कारण, मुझे आगे बढ़ने का मौका दिया।
हम सब मिल आपको याद करेंगें,
याद रखेगी दुनिया आपको,जब तक सूरज चाँद रहेंगेँ ।
उपकार किया है हम पर इतना,उसको हम ना भूल सकेंगें ।
रचनाकार–
दुर्गा देवी ( आशा- किरण)
प्राचार्या
पी० एम० श्री० रा० व० मा० वि० समालखा( पानीपत)
हरियाणा

