Friday, April 17, 2026
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विद्या और ज्ञान वही है, जो अहंकार की बजाय इंसान में विनय (विनम्रता) करे पैदा

मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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एक बार कुछ बच्चे फुटबॉल खेल रहे थे । वहाँ से एक संत जा रहे थे । तभी एक बच्चे ने संत से सवाल किया
गुरुजी : इस फुटबॉल ने कैसे कर्म किए हैं, जो इसे इतनी लातें खानी पड़ रही हैं ? संत ने बहुत सुंदर जवाब दिया कि बेटे, ये इसके कर्म नहीं, बल्कि इसमें जो हवा भरी है, इसीलिए इसे इतनी लातें खानी पड़ रही हैं । ठीक इसी तरह हमारे अंदर भी जब तक अहंकार रुपी हवा भरी होती है, तब तक हमें भी अपने जीवन में लातें ही खानी पड़ती हैं..!
फुटबॉल का यह उदाहरण वाकई लाजवाब है। जिस तरह फुटबॉल के भीतर की हवा उसे चोट सहने पर मजबूर करती है, वैसे ही अहंकार इंसान को मानसिक और सामाजिक रूप से अशांत रखता है । जब इंसान ‘मैं’ से भर जाता है, तो वह लचीलापन खो देता है। विनम्रता ही वह गुण है, जो हमें जीवन की ठोकरों से बचाती है। यहां यह कहा भी गया है कि “विद्या ददाती विनयं” — अर्थात विद्या और ज्ञान वही है, जो इंसान में विनय (विनम्रता) पैदा करे, ना कि अहंकार। वाकई, अगर इंसान खुद को अहंकार से खाली कर ले, तो वह जीवन के हर प्रहार को सहजता से झेल सकता है ।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

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