उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री जेके माहेश्वरी के मुख्यातिथ्य में ‘‘शुद्ध वायु का अधिकार-मानव अधिकार’’ पर कार्यक्रम 11 सितम्बर को
अपने स्थापना वर्ष से ही मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग, भोपाल प्रतिवर्ष मानव अधिकारों के संरक्षण की दिशा में जनसंवेदना प्रसार हेतु समय-समय पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करता रहा है।
इसी अनुक्रम में मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग द्वारा अपने 28वें स्थापना दिवस के अवसर पर एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। यह कार्यक्रम रविवार, 11 सितम्बर 2022 को सुबह 10ः30 बजे से आर.सी.व्ही.पी. नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी, भोपाल के लघु सभागार (आॅडिटोरियम) में होगा। कार्यक्रम का केन्द्रीय विषय ‘‘शुद्ध वायु का अधिकार-मानव अधिकार’’ रखा गया है। कार्यक्रम के आयोजन का मुख्य उद्देश्य जन सामान्य, फील्ड अधिकारियों व विधि विद्यार्थियों को वायु प्रदूषण से पैदा होने वाले विपरीत हालातों के बारे में विस्तार से अवगत कराना एवं उन्हें वायु प्रदूषण को रोकने की दिशा में सक्रिय होने के लिये संवेदनशील बनाना है। आयोग के 28वे स्थापना दिवस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि माननीय उच्चतम न्यायालय, नई दिल्ली के न्यायाधीश माननीय न्यायमूर्ति श्री जितेन्द्र कुमार माहेश्वरी होंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग के माननीय अध्यक्ष न्यायमूर्ति श्री नरेन्द्र कुमार जैन करेंगे। कार्यक्रम में मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग के माननीय सदस्यद्वय श्री मनोहर ममतानी एवं श्री सरबजीत सिंह विशिष्ट अतिथि के रूप में तथा उच्चतम न्यायालय, नई दिल्ली के वरिष्ठ अधिवक्ता श्री सुशील कुमार जैन कार्यक्रम के मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहेंगे।
इसके अलावा आमंत्रित न्यायमूर्तिगण, न्यायाधीशगण, मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग, भोपाल के सचिव श्री शोभित जैन, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक श्री बी.बी. शर्मा, राज्य शासन के वरिष्ठ अधिकारीगण, वायु प्रदूूषण निवारण एवं पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में कार्य करने वाले शासकीय संगठनों में मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमपीपीसीबी) भोपाल, पर्यावरण नियोजन एवं समन्वय संगठन (एप्को) भोपाल सहित उद्योग संचालनालय, मप्र शासन के अधिकारीगण तथा कैरियर काॅलेज आॅफ लाॅ व राजीव गांधी लाॅ काॅलेज, भोपाल में अध्ययनरत विद्यार्थीगण भी प्रतिभागी के रूप में उपस्थित रहेंगे।
नसबंदी हुई फेल, आवेदिका को 40 हजार रूपये एक माह में अदा करें, आयोग ने की अनुशंसा
गुना जिले की राघौगढ़ तहसील के ग्राम खेजड़ा निवासी एक आवेदिका श्रीमती पार्वती बाई धर्मपत्नी श्री बंटी कुशवाह की नसबंदी फेल होने के मामले में मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग ने राज्य शासन से कहा है कि आवेदिका को 40 हजार रूपये क्षतिपूर्ति राशि एक माह में अदा करें। साथ ही परिवार नियोजन कार्यक्रम के अन्र्तगत किये जाने वाले नसबंदी फेल होने पर थ्ंउपसल च्संददपदह प्दकमउदपजल ैबीमउम के अन्तर्गत दावा जमा कराने एवं परामर्श देने की जवाबदारी संबंधित प्रेरक/आशा कार्यकर्ता, संबंधित पीएचसी के मेडिकल आॅफीसर या जिसे राज्य शासन उचित समझे, का दायित्व तय कर दिया जाये।
मालूम हो कि आयोग के प्रकरण क्रमांक 7829/गुना/2019 के अनुसार आवेदिका श्रीमती पार्वती कुशवाह ने अपना नसबंदी आॅपरेशन 12 जनवरी 2017 को प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, मधुसूदनगढ़, जिला गुना में कराया था। आवेदिका की नसबंदी फेल होने के कारण उसने क्षतिपूर्ति राशि दिलाये जाने संबंधी आवेदन 11 जनवरी 2019 को प्रस्तुत किया। किंतु परीक्षण में उपस्थित नहीं होने के कारण इनका क्षतिपूर्ति का प्रकरण तैयार नहीं किया जा सका। मध्यप्रदेश क्वालिटी एश्योरेंश गाईडलाईन के अनुसार नसबंदी आॅपरेशन फेल होने की सूचना 90 दिन के भीतर दिये जाने पर ही क्षतिपूर्ति राशि मिलने का प्रावधान है। क्षतिपूर्ति नहीं मिलने पर आवेदिका ने आयोग में आवेदन लगाकर उसे क्षतिपूर्ति राशि दिलाने का अनुरोध किया गया। आयोग द्वारा मामले की निरंतर सुनवाई कर गहन विवेचना उपरांत राज्य शासन को अनुशंसा की गयी। आयोग ने राज्य शासन से कहा है कि श्रीमती पार्वती बाई की नसबंदी फेल होने पर उसकी सामयिक सूचना के बाद भी उसका सामयिक स्वास्थ्य उपचार एवं जांचें न कराने व उसके मुआवजा दावा तैयार कराने के प्रति उपेक्षापूर्ण रवैये के कारण उसकी गरिमा, स्वास्थ्य एवं न्याय पाने के मानव अधिकारों की उपेक्षा हुयी। इसीलिये राज्य शासन पार्वती बाई को 40 हजार रूपये क्षतिपूर्ति राशि एक माह में भुगतान कर दे। अनुशंसा में आयोग ने यह भी कहा है कि राज्य शासन पार्वती बाई के थ्ंउपसल च्संददपदह प्दकमउदपजल ैबीमउम के अन्तर्गत किये गये नसबंदी आॅपरेशन के फेल होने पर क्षतिपूर्ति राशि के भुगतान के संबंध में परीक्षण कर एक माह में निर्णय ले। परिवार नियोजन कार्यक्रम के अन्र्तगत किये जाने वाले नसबंदी आॅपरेशन के फेल होने पर समय सीमा में थ्ंउपसल च्संददपदह प्दकमउदपजल ैबीमउम के अन्तर्गत दावा आवेदन जमा कराने तथा गर्भपात संबंधित विधिस्वरूप परामर्श की जवाबदारी प्रेरक/संबंधित आशा कार्यकर्ता, संबंधित पीएचसी के मेडिकल आॅफिसर या जिसे भी राज्य शासन उचित समझे, का दायित्व तय कर दिया जाये। इस संबंध में स्पष्ट निर्देश भी जारी किये जायें। नसबंदी आॅपरेशन के फेल होने की स्थिति में दावा आवेदन प्रस्तुत करने के लिये ूपजीपद 90 कंले तिवउ जीम वबबनतमदबम व िमअमदजए ऐसे प्रकरणों में, जहां महिला गर्भपात करवाती है, तो गर्भपात होने के 90 दिन के बाद से तिवउ जीम वबबनतमदबम व िमअमदज गणना की शुरूआत या महिला प्रसव करवाने का निर्णय लेती है, तो प्रसव के 90 दिन बाद से वबबनतमदबम व िमअमदज की गणना की शुरूआत को मान्य किये जाने पर राज्य शासन सहानुभूतिपूर्वक विचार करे।

