मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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किसी भी राष्ट्र की उन्नति और सामर्थ्य उसकी सैन्य शक्ति या ऊँची इमारतों से नहीं, बल्कि वहाँ के नागरिकों के बौद्धिक स्तर से मापी जाती है। भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश के लिए शिक्षा केवल साक्षरता का माध्यम नहीं, बल्कि एक सशक्त और आत्मनिर्भर राष्ट्र के निर्माण की पहली शर्त है। एक शिक्षित समाज अंधविश्वास, जातिवाद, लिंगभेद और कट्टरता जैसी सामाजिक बुराइयों को जड़ से मिटाने में सक्षम होता है। जब व्यक्ति शिक्षित होता है, तो वह तार्किक सोच विकसित करता है, जिससे समाज में समरसता और बंधुत्व की भावना प्रबल होती है। जब समाज का हर वर्ग शिक्षित होगा, तो गरीबी और बेरोजगारी में भी कमी आएगी ।
भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। एक शिक्षित नागरिक ही अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक होता है क्योंकि शिक्षा वह निवेश है जिसका लाभ आने वाली पीढ़ियों तक मिलता है। यदि हमें भारत को आत्मनिर्भर बनाना है और विकसित राष्ट्रों की श्रेणी में अग्रसर करना है, तो हमें शिक्षा की गुणवत्ता और पहुंच को हर गांव, हर घर तक सुनिश्चित करना होगा। वास्तव में, ज्ञान से प्रकाशित समाज ही एक अजेय और सशक्त भारत की असली नींव है।
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

