Friday, April 17, 2026
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भारत में ‘Reservation System’ और अमेरिका में ‘Affirmative Action’ का उद्देश्य क्या है ??

मनसा राम ज़िला ब्यूरो चीफ बिलासपुर हिमाचल प्रदेश | भारत की आरक्षण व्यवस्था में संविधान के अनुच्छेद 15, 16 शिक्षा, सरकारी नौकरियों में समान अवसर प्रदान करना,आर्टिकल 330 & 332 के तहत एससी/एसटी  को लोकसभा, राज्य विधानसभाओं में सीटों का आरक्षण देना, आर्टिकल 243D 243T के तहत पंचायतों, और नगरपालिकाओं में एससी/एसटी की महिलाओं को आरक्षण देना था | जो उनकी जनसंख्या के आधार पर उनको प्रतिनिधित्व दिया गया वह अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। और दूसरा अमेरिका का अफ्रमेटिव एक्शन दोनों का उद्देश्य ऐतिहासिक अन्याय,असमानता,शोषण,प्रिविलेज शक्तियों को दूर करना वंचित समूहों,अल्पसंख्यक समुदायों,हाशिए पर पड़े समूहों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना था ।

भारत में जाति आधारित कोटा सिस्टम लागू है।

अमेरिका में नस्लीय विविधता बढ़ाने के लिए स्वैच्छिक, न्यायिक कानून हैं।

अमेरिका में अफरमेटिव एक्शन नीति की जड़े 1940 के दशक से अमेरिकी राष्ट्रपति फ्रेंकलिन डी.रूजवेल्ट के अध्यादेश से मानी जाती है | 

लेकिन Affirmative Action इस सरकारी नीति की शुरुआत 1961में राष्ट्रपति जॉन एफ केनेडी ने 6 मार्च को एक कार्यकारी आदेश (Executive Order 10925) पारित किया गया है | जिसमें संघीय ठेकेदारों फेडरल  कांट्रेक्टर्स को यह सुनिश्चित करने का आदेश दिया गया कि नौकरी में आवेदकों कर्मचारियों के साथ जाति,पंथ,रंग या राष्ट्रीय मूल के वाबजूद समान व्यवहार किया जाए।

इसके बाद 1965 में राष्ट्रपति लिंडन बी.जॉनसन ने एग्जीक्यूटिव आर्डर 11246 जारी कर इस कानून को और अधिक मजबूत किया है | जिसके तहत सरकारी ठेकेदारों को अल्पसंख्यकों के लिए रोजगार के अवसर प्रदान करने को बाध्य किया वहीं अमेरिकी ब्लैक नागरिकों और महिलाओं के लिए सरकारी नौकरियों में समान अवसर और शिक्षा की प्राप्ति के लिए अफरमेटिव एक्शन को स्थापित किया क्योंकि वहां सिविल राइट्स जैसे आंदोलनों का लंबा संघर्ष रहा है इसके अलावा आंदोलन प्रमुख नेता मार्टिन लूथर किंग जूनियर द्वारा ( Civil  Rights Act1964 ) और (Voting Rights Act 1965 ) को पारित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

W.E.B. Du Bois जो NAACP के संस्थापक सदस्यों में से एक थे उन्होंने अश्वेतों के कानूनी और राजनीतिक अधिकारों की बौद्धिक लड़ाई लड़ी | इड़ा वी वेल्स एक पत्रकार एक्टिविस्ट जिन्होंने 19,20 वीं सदी में अश्वेतों की लिंचिंग के खिलाफ और उनके नागरिक अधिकारों के लिए संघर्ष किया 

Modren Activists  (Benjamin Crumps ), लोनीता बेकर जैसे वकील,अमेरिकी कानून में अश्वेतों के हितों नागरिक अधिकारों और नस्लीय समानता की रक्षा करने वाले अनगिनत कार्यकर्ता और वकील रहे हैं | यह अमेरिका में निरन्तर चलने वाला सिविल राइट्स आंदोलन है | जो 19 वीं सदी से लेकर आज तक ( Black Lives Mattar) का सफर जारी है । 

1971 में जॉन  रावल्स ने अपनी किताब द थ्योरी ऑफ़ जस्टिस के माध्यम से Affirmative Action के पक्ष में तर्क दिए उनके अनुसार (Fair Equality of Opportunity)उचित अवसरों की समानता पर जोर दिया जहां भी ऐतिहासिक अन्याय मौजूद है | उसे खत्म करने की वकालत की,जॉन रॉवल्स का मानना है | कि सामाजिक आर्थिक असमानताएं तभी न्यायसंगत हैं | जब वे समाज के सबसे वंचित सदस्यों Least advantages members के लिए न्याय सुनिश्चित करें Affirmative Action marginalized communities को आगे बढ़ाने का एक माध्यम है जो इस थ्योरी के अनुरूप है।

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