मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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किसी भी संगठन की सफलता केवल संसाधनों या प्रतिभाशाली लोगों पर निर्भर नहीं करती, बल्कि इस बात पर निर्भर करती है कि वहां उत्तरदायित्व और जिम्मेदारी का भाव कितना गहरा है। एक संगठन को अक्सर एक जटिल मशीन के रूप में देखा जाता है। जिस प्रकार एक मशीन के सुचारू संचालन के लिए उसके हर छोटे-बड़े पुर्जे का सही समय पर और सही दिशा में घूमना अनिवार्य है, उसी प्रकार एक संगठन के लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए उसके सदस्यों के बीच तालमेल आवश्यक है कयोंकि तालमेल की धुरी ही 'जिम्मेदारी' है। बिना जिम्मेदारी के, संगठन केवल कागजों पर मौजूद व्यक्तियों का एक समूह मात्र बनकर रह जाता है।
अंततः, एक संगठन अपनी संरचना से नहीं, बल्कि अपने कार्य-संस्कृति से पहचाना जाता है। जिम्मेदारी की भावना ही वह तेल है, जो संगठन के पुर्जों के बीच घर्षण कम करती है और उनमें तालमेल बिठाती है। बिना जिम्मेदारी के, प्रतिभाशाली लोगों का समूह भी केवल एक भीड़ बनकर रह जाता है। यदि हम चाहते हैं कि हमारी 'संगठन रूपी मशीन' उत्कृष्ट परिणाम दे, तो हमें हर स्तर पर जिम्मेदारी और स्वामित्व की भावना को विकसित करना होगा।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

