मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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कलयुग को नैतिक पतन का काल माना गया है। आज के समय में यह धारणा आम हो गई है कि “बुरे के साथ बुरा हो न हो, पर अच्छे के साथ बुरा जरूर होता है।” यह विचार व्यक्ति के मन में हताशा और न्याय के प्रति अविश्वास पैदा करता है। अक्सर अच्छे लोग संवेदनशील होते हैं। वे दूसरों के दुख और अन्याय को महसूस करते हैं, जबकि बुरा व्यक्ति संवेदनहीन होकर दूसरों को कुचलते हुए आगे बढ़ जाता है। इस कारण, बुरे व्यक्ति की ‘सफलता’ बाहर से चमकती हुई दिखाई देती है, जबकि अच्छे व्यक्ति का ‘संघर्ष’ हमें उसके साथ हो रहे अन्याय जैसा प्रतीत होता है।
अंततः, यह केवल दृष्टिकोण का विषय है। बुराई के साथ मिलने वाली सफलता खोखली और अशांति से भरी होती है, जबकि अच्छाई के मार्ग पर मिलने वाले कष्ट व्यक्ति को आत्मिक संतोष और साहस देते हैं। भले ही कलयुग में सत्य का मार्ग कठिन है, परंतु अंत में जीत सत्य और नैतिकता की ही होती है। हमें परिस्थितियों को देखकर अपनी अच्छाई नहीं छोड़नी चाहिए, क्योंकि अच्छाई स्वयं में ही एक प्रतिफल है।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

