मूकनायक/नरेश जाटव/कैलादेवी/करौली/ राजस्थान।
करौली जिले में राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएचओ) को एक दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया। इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य मानसिक रोगों से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करना और आमजन तक समय पर उपचार की सुविधा सुनिश्चित करना था।जिला मानसिक स्वास्थ्य इकाई द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने बताया कि मानसिक रोग किसी दैवीय प्रकोप या अंधविश्वास का परिणाम नहीं हैं, बल्कि यह एक सामान्य चिकित्स कीय समस्या है जिसका समय पर उपचार संभव है। जिलेभर से आए सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों ने इस प्रशिक्षण में भाग लिया। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जयंतीलाल मीना ने इस अवसर पर कहा कि समाज में मानसिक रोगों को लेकर कई गलत धारणाएं प्रचलित हैं, जिन्हें दूर करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने जोर दिया कि समय पर पहचान और उपचार से मरीज सामान्य जीवन जी सकता है।मनोचिकित्सक डॉ. प्रेमराज मीना ने स्पष्ट किया कि मानसिक रोग भूत-प्रेत, जादू-टोना या टोटकों से नहीं होते, बल्कि मस्तिष्क में होने वाले रासायनिक बदलावों के कारण उत्पन्न होते हैं। उन्होंने शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करने और उचित चिकित्सा लेने की सलाह दी।डॉ. रामस्वरूप ने बताया की सामुदायिक स्वास अधिकारी सीथे आमजन से जूुड़े होते हैं। वे मानसिक समस्याओं कीप्रारंभिक पहचान कर मरीजों को सही मार्गदर्शन प्रदान कर सकते हैं, जिससे बीमारी को गंभीर होने से रोका जा सके।साइकेट्रिक नर्स गौरव गोयल ने टेली -मानस हेल्पलाइन 14416 के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि किसी भी मानसिक या भावनात्मक परेशानी में लोग घर बैठे इस हेल्पलाइन से विशेषज्ञ परामर्श ले सकते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि सरकारी अस्पतालों में मानसिक रोगों का निःशुल्क उपचार उपलब्ध है और मानसिक दिव्यांगों के प्रमाण पत्र हर सोमवार जिलाअस्पताल में बनाए जाते हैं। प्रशिक्षण में उपस्थित अधिकारियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में अब मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ रही है। लोगों का मानसिक स्वास्थ्य के महत्व को समझना स्वास्थ्य सेवाओं के लिए सकारात्मक संकेत है।

