Friday, April 17, 2026
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धम्मपद वाणी

एकं धम्मं अतीतस्स, मुसावादिस्स जन्तुनो।
चितिण्ण परलोकस्स, नत्थि पापं अकारियं।।

अर्थ:- एक धर्म सत्य का है लेकिन उस पर अतिक्रमण कर जो झूठ बोलता है, परलोक के प्रति उदासीन ऐसे प्राणी के लिए ऐसा कोई पाप कर्म नहीं बचता जो वह नहीं कर सकता हो।
साधु, साधु, साधु
भवतु सब्बं मगलं
✍️बौद्धाचार्य पूरणमल बौद्ध प्रदेश अध्यक्ष दि बुद्धिष्ट सोसायटी आफ़ इंडिया भारतीय बौद्ध महासभा राजस्थान दक्षिण

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