आज का दिन भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में हमेशा याद रहेगा।
6 फरवरी 1950 को डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर ने संसद में भाग लेकर भारत के पहले लोकसभा आम चुनाव पर ऐतिहासिक वाद-विवाद किया।
यह सिर्फ संसद की बहस नहीं थी, बल्कि हर नागरिक के अधिकार और जिम्मेदारी का संदेश था।
डॉ. अंबेडकर ने स्पष्ट किया कि वोट सिर्फ अधिकार नहीं, बल्कि शक्ति और जिम्मेदारी है।
कल्पना कीजिए, जब हमारा देश नए लोकतंत्र की राह पर कदम रख रहा था, तब उन्होंने यह साबित किया कि लोकतंत्र की नींव हर नागरिक के हाथों में है।
उनकी बात आज भी उतनी ही प्रासंगिक है।
लोकतंत्र में भाग लेना हमारा कर्तव्य है ।
हर वोट का सही इस्तेमाल समाज बदल सकता है
हमारी शक्ति हमारी जागरूकता में है
6 फरवरी 1950 का दिन हमें याद दिलाता है कि हर वोट, हर निर्णय, हर सोच हमारे देश का भविष्य बनाता है।
डॉ. अंबेडकर ने केवल संविधान और अधिकारों की नींव रखी, बल्कि हमें यह भी सिखाया कि लोकतंत्र में भाग लेना हमारी जिम्मेदारी और शक्ति है।
याद रखें: लोकतंत्र केवल सत्ता का खेल नहीं, बल्कि हमारी आवाज़, हमारा अधिकार और हमारी जिम्मेदारी है।
आज अपने वोट और अपने अधिकारों को सम्मान दें।
संकलन:-
बौद्धाचार्य पूरणमल बौद्ध प्रदेश अध्यक्ष दि बुद्धिष्ट सोसायटी आफ़ इंडिया भारतीय बौद्ध महासभा राजस्थान दक्षिण

