उमाजी नाइईक का जन्म
7सितम्बर1791भिवंडी गांव पुरन्दर तालुका, पुणे जिला, राज्य महाराष्ट्र, राष्ट्र भारत
पुण्यतिथि
3 फ़रवरी 1832 (उम्र 40 वर्ष)
पुणे मे,मौत की वजह,फाँसी दी गई थी।
उनका उपनाम
विश्व क्रान्तिवीर नरवीर राजे उमाजी नाईक,प्रसिद्धि का कारण,Indian,Independ ee,Movement
उनकी माता का नाम लक्ष्मी बाई नाईक खोमाने था पिता का नाम
दादोजी नाईक खोमाने*
नरवीर उमाजी नाईक का जन्म पुणे जिले के पुरन्दर तहसील के भिवंडी गांव में हुआ था। अंग्रेजों के अत्याचारी शासन के विरोध में उन्होने ही सर्वप्रथम क्रांति की ज्वाला जलाई थी । यह उनका पहला विद्रोह माना जाता है। उन्होंने सर्वप्रथम अंग्रेजों की आर्थिक नाड़ी को दुर्बल करने का प्रयास किया। 24 फरवरी 1824 को अंग्रेजों का भांबुडा के दुर्ग में छिपाकर रखा गया कोष (खजाना) उमाजी ने अपने सशस्त्र साथियों की सहायता से लूटा एवं अंग्रेजों की नाक में दम कर दिया ।
उसी समय अंग्रजोंने उमाजी नाईक को पकड़ने का आदेश दिया। उमाजी नाईक को पकड़ने वाले को 10 हजार रुपयों का पुरस्कार घोषित किया गया। उमाजी ने लोगों को संगठित कर छापामार पद्धति से युद्ध करते हुए अंग्रेजों के सामने बहुत बड़ी चुनौती खड़ी कर दी।
15 दिसम्बर 1831, उमाजी के जीवन का काला दिन बना। भोर के एक गांव में अंग्रेज सरकार ने उन्हें पकडकर उन पर न्यायालय में राजद्रोह एवं देशद्रोह का अभियोग चलाया। इस अभियोग में फांसी का दंड सुनाकर, 3 फरवरी 1832 को पुणे के खडकमाल न्यायालय में उमाजी नाईक को फांसी दे दी गई । केवल 41 वर्ष की अवस्था में उमाजी नाईक देश के लिए वीरगति को प्राप्त हुए।
संकलन :-
✍️ बौद्धाचार्य पूरणमल बौद्ध प्रदेश अध्यक्ष दि बुद्धिष्ट सोसायटी आफ़ इंडिया भारतीय बौद्ध महासभा राजस्थान दक्षिण

