मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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अतीत हमारे लिए एक शिक्षक की तरह है। जीवन में हुई गलतियाँ और असफलताएँ हमें यह बताती हैं कि कहाँ सुधार की आवश्यकता है। अपनी पिछली हार को बोझ बनाने के बजाय उसे अनुभव के रूप में स्वीकार करना चाहिए। जो व्यक्ति अपनी पुरानी गलतियों से नहीं सीखता, वह उन्हें दोहराता रहता है, जबकि वर्तमान ही एकमात्र समय है, जिस पर हमारा नियंत्रण है। आज का श्रम ही कल के फल का बीज है। यदि हम केवल भविष्य की कल्पना करेंगे और ‘आज’ को आलस्य में बिता देंगे, तो सफलता दूर होती जाएगी। वर्तमान में छोटे-छोटे लक्ष्यों पर काम करना और मेहनत करना दीर्घकालिक सफलता की नींव रखता है।
भविष्य के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण तनाव को कम करता है और प्रेरणा देता है। जब हम अपनी मेहनत पर और आने वाले समय पर भरोसा रखते हैं, तो विपरीत परिस्थितियों में भी हमारा मनोबल नहीं टूटता। विश्वास हमें जोखिम लेने और नई संभावनाओं को तलाशने की शक्ति देता है। इस प्रकार खुशहाल जीवन का रहस्य इन तीनों का सही सामंजस्य है। जब आप अतीत के पछतावे को छोड़ देते हैं, वर्तमान को पूरी शक्ति से जीते हैं और भविष्य को लेकर आशान्वित रहते हैं, तो जीवन में संतोष और समृद्धि अपने आप आने लगती है।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

