देवस्वामित्व भूमि पर अवैध नामांतरण का मामला श्री महादेव जी मंदिर की 6.877 हेक्टेयर भूमि को निजी दर्शाने का आरोप*
मूकनायक छत्तीसगढ़
महिपाल सिंह टंडन
सक्ती (छत्तीसगढ़)
जिला सक्ती की तहसील भोथिया अंतर्गत ग्राम मलनी में स्थित श्री महादेव जी मंदिर की देवस्वामित्व (Deity Property) भूमि को लेकर गंभीर राजस्व एवं विधिक अनियमितताओं का मामला सामने आया है। आरोप है कि मंदिर की भूमि, जिस पर विधि अनुसार देवता स्वयं विधिक स्वामी होते हैं, को एक निजी व्यक्ति के नाम एकल नामांतरण कर दिया गया, जो कि प्रचलित कानूनों एवं राजस्व नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है।
भूमि का विवरण
विवादित भूमि का विवरण निम्नानुसार बताया गया है—
कुल खसरा संख्या : 31
कुल रकबा : 6.877 हेक्टेयर
भूमि का स्वरूप : श्री महादेव जी मंदिर (देवस्वामित्व भूमि)
उक्त भूमि को कथित रूप से श्याम सुंदर चंद्रा द्वारा अपने नाम राजस्व अभिलेख (खसरा-खतौनी) में दर्ज करा लिया गया।
देवस्वामित्व भूमि पर विधिक स्थिति
विधि एवं न्यायिक दृष्टांतों के अनुसार—
मंदिर की संपत्ति देवता की संपत्ति होती है (Juristic Person)
देवस्वामित्व भूमि का संरक्षक एवं प्रबंधक जिला कलेक्टर होता है
बिना सक्षम सिविल न्यायालय के आदेश एवं जिला कलेक्टर की पूर्वानुमति
नामांतरण (Mutation)
विक्रय (Sale)
हस्तांतरण (Transfer)
अथवा निजी उपयोग
विधिसम्मत नहीं है
ऐसी स्थिति में निजी नामांतरण को प्रथम दृष्टया शून्य एवं अवैध (Void ab initio) माना जा रहा है।
राजस्व प्रक्रिया में अनियमितता
सूत्रों के अनुसार यह नामांतरण पटवारी, राजस्व निरीक्षक (RI), तहसील कार्यालय तथा संबंधित राजस्व अमले की संस्तुति एवं प्रविष्टि के बिना संभव नहीं हो सकता। इससे यह मामला प्रशासनिक लापरवाही अथवा कर्तव्य में आपराधिक चूक (Dereliction of Duty) के साथ-साथ संभावित मिलीभगत की ओर संकेत करता है।
कलेक्टर के समक्ष प्रकरण लंबित होने के बावजूद कब्ज़ा
प्राप्त जानकारी के अनुसार यह प्रकरण वर्तमान में माननीय कलेक्टर, जिला सक्ती के समक्ष लंबित है। इसके बावजूद—
विवादित भूमि पर कथित कब्ज़ा बनाए रखा गया
स्वयं को स्वामी बताकर कृषि कार्य किया गया
उपज का निजी लाभ उठाया गया
यह कृत्य न्यायिक प्रक्रिया की अवमानना एवं प्रशासनिक आदेशों की अवहेलना की श्रेणी में आता है।
धान खरीदी मंडी में भौतिक सत्यापन पर प्रश्न
आरोप यह भी है कि उक्त देवस्वामित्व भूमि को निजी भूमि दर्शाते हुए—
धान खरीदी मंडी में भौतिक सत्यापन कराया गया
धान का विक्रय कर आर्थिक लाभ अर्जित किया गया
जब भूमि का स्वामित्व विवादित हो एवं देवस्वामित्व का दावा लंबित हो, तब इस प्रकार का सत्यापन एवं विक्रय राजस्व नियमों एवं मंडी अधिनियमों का संभावित उल्लंघन माना जा रहा है।
आस्था, कानून और प्रशासनिक साख का प्रश्न
यह प्रकरण केवल भूमि विवाद तक सीमित न होकर—
धार्मिक आस्था पर प्रतिकूल प्रभाव
राजस्व कानूनों की अवहेलना
प्रशासनिक निष्पक्षता एवं विश्वसनीयता पर प्रश्न
उठाता है। देवस्वामित्व भूमि की सुरक्षा राज्य का संवैधानिक दायित्व है।
कार्रवाई की मांग
मामले में यह मांग उठाई जा रही है कि—
कलेक्टर स्तर पर लंबित प्रकरण का शीघ्र एवं पारदर्शी निराकरण किया जाए
श्री महादेव जी मंदिर की देवस्वामित्व भूमि को अवैध कब्ज़े से मुक्त कराया जाए
अवैध नामांतरण को निरस्त (Cancel) किया जाए
नामांतरण, भौतिक सत्यापन एवं मंडी विक्रय में संलिप्त अधिकारियों की जवाबदेही तय कर विभागीय एवं वैधानिक कार्रवाई की जाए
यह प्रकरण अब आस्था, विधि एवं प्रशासनिक मर्यादा की कसौटी बन चुका है।


