Thursday, February 26, 2026
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कवच’ ट्रायल का शुभारंभ — रेल संरक्षा को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

मूकनायक छत्तीसगढ़
बिलासपुर

रेल संरक्षा एवं परिचालन को और अधिक मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के बिलासपुर मंडल के अंतर्गत बिलासपुर–जयरामनगर रेलखंड में ‘कवच’ लोकोमोटिव ट्रायल का शुभारंभ किया गया है। यह ट्रायल ब्लॉक सेक्शन में स्थापित प्रोग्राम्ड RFID टैग्स की रीडिंग को ‘कवच’ से सुसज्जित लोकोमोटिव के माध्यम से सत्यापित करने के उद्देश्य से किया गया। ट्रायल के दौरान ‘कवच’ की ऑटोमैटिक ब्रेकिंग प्रणाली को भी असामान्य एवं अप्रत्याशित परिचालन परिस्थितियों में सफलतापूर्वक परखा गया।

इन ट्रायल्स का सफलतापूर्वक संपन्न होना दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे में ‘कवच’ तकनीक के औपचारिक रोलआउट की शुरुआत को दर्शाता है, जिसका उद्देश्य ट्रेन परिचालन में संरक्षा को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाना है।

‘कवच’ ट्रायल के आरंभ के साथ ही रेलवे अधिकारी एवं कर्मचारी इस अत्याधुनिक प्रणाली का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त कर रहे हैं, जिससे दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के अन्य रेल खंडों में ‘कवच’ के त्वरित कार्यान्वयन में सहायता मिलेगी। ट्रायल्स में ट्रेन रनिंग स्टाफ की भी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई है, ताकि वे विभिन्न परिचालन परिस्थितियों में ‘कवच’ के कार्यप्रणाली को भली-भांति समझ सकें और प्रणाली से पूर्णतः परिचित हो सकें।

यह ट्रायल ऐसे समय में किया जा रहा है, जब दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे क्षेत्राधिकार में व्यापक स्तर पर ‘कवच’ कार्यों को शुरू किया गया है । स्टेशन-‘कवच’, लोको-‘कवच’, दूरसंचार टावर, ऑप्टिकल फाइबर केबल (OFC) नेटवर्क एवं अन्य संबंधित अधोसंरचना के लिए टेंडर पहले ही जारी किए जा चुके हैं। दक्षिण पूर्व मध्य में ‘कवच’ परियोजना की कुल स्वीकृत लागत लगभग ₹1,654 करोड़ है।

वर्तमान में नागपुर–झारसुगुड़ा खंड पर ‘कवच’ का कार्य प्रगति पर है, जो उच्च घनत्व वाले मुंबई–हावड़ा कॉरिडोर के 614 रूट किलोमीटर को कवर करता है। वित्तीय वर्ष 2025–26 के दौरान नागपुर–गोंदिया खंड 135 रूट किलोमीटर) में ‘कवच’ रोलआउट का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके अतिरिक्त, दक्षिण नेटवर्क के अन्य विभिन्न खंडों पर भी ‘कवच’ कार्य प्रगति पर हैं।

‘कवच’ भारत की राष्ट्रीय ऑटोमैटिक ट्रेन सुरक्षा (Automatic Train Protection – ATP) प्रणाली है, जिसे सिग्नल पासिंग एट डेंजर, आमने-सामने एवं पीछे से होने वाली टक्करों को रोकने, गति पर्यवेक्षण सुनिश्चित करने तथा मानवीय त्रुटियों से होने वाली दुर्घटनाओं के जोखिम को कम करने के लिए विकसित किया गया है। इन-कैब सिग्नल डिस्प्ले, मूवमेंट अथॉरिटी की सतत निगरानी तथा आवश्यकता पड़ने पर स्वचालित ब्रेकिंग हस्तक्षेप के माध्यम से ‘कवच’ रेल संरक्षा को अत्यधिक सुदृढ़ बनाता है और लोको पायलटों एवं परिचालन कर्मचारियों के आत्मविश्वास को बढ़ाता है।

‘कवच’ के प्रथम ट्रायल के शुभारंभ के साथ, दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे का लक्ष्य न केवल अपने नेटवर्क में ‘कवच’ का शीघ्र कार्यान्वयन करना है, बल्कि एक मजबूत प्रशिक्षण एवं दक्षता पारिस्थितिकी तंत्र स्थापित करना भी है, जिससे रेलवे कर्मी इस महत्वपूर्ण संरक्षा प्रणाली के संचालन एवं अनुरक्षण में पूर्णतः दक्ष हो।

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