Thursday, February 26, 2026
Homeहिमाचल प्रदेशशिमला-आईजीएमसी शिमला घटना पर SAMDCOT की अपील: सत्य, सुरक्षा और निष्पक्षता सुनिश्चित...

शिमला-आईजीएमसी शिमला घटना पर SAMDCOT की अपील: सत्य, सुरक्षा और निष्पक्षता सुनिश्चित की जाए।

गोपाल दास कोटखाई | हिमाचल प्रदेश के प्रमुख चिकित्सा संस्थान आईजीएमसी शिमला में हाल ही में डॉक्टर और मरीज से जुड़ी दुर्भाग्यपूर्ण हिंसक घटना को लेकर SAMDCOT (State Association of Medical and Dental Colleges Teachers) ने गहरी चिंता व्यक्त की है। संगठन ने प्रशासन,मीडिया और आम जनता से अपील की है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुँचने से पहले घटना की पूरी कड़ी को देखा जाए न कि चयनित और संपादित वीडियो क्लिप्स के आधार पर राय बनाई जाए।

SAMDCOT ने कहा कि वर्तमान में प्रसारित हो रहे वीडियो केवल प्रतिक्रिया के कुछ अलग-थलग क्षण दिखाते हैं, जबकि पूरा फुटेज डॉक्टरों के प्रति लंबे समय तक चली उकसाहट,चिल्लाहट,धमकियों और डराने-धमकाने को स्पष्ट करता है। संदर्भ से काटे गए कुछ सेकंड के आधार पर सत्य का आकलन उचित नहीं है। पुरे घटनाक्रम पर संगठन द्वारा कुछ प्रमुख तथ्य जो सामने रखे गए

1. अस्पताल के भीतर धमकियाँ और भीड़ का दबाव

कई वीडियो में भीड़ द्वारा न्याय (Mob Justice) की खुली माँगें सुनाई देती हैं, जिनमें डॉक्टर को भीड़ के हवाले करने की बात कही गई।

पल्मोनरी मेडिसिन वार्ड को तीन घंटे से अधिक समय तक घेरकर रखा गया, जिससे सभी भर्ती मरीजों—इस घटना से जुड़े मरीज सहित—की चिकित्सा गंभीर रूप से प्रभावित हुई।

ऑडियो रिकॉर्डिंग्स में अस्पताल के भीतर लोगों को दूसरों को बुलाकर डॉक्टरों को धमकाने के लिए कहते सुना जा सकता है, जिससे भय और अराजकता का माहौल बना।

प्रशासन की त्वरित कार्रवाई के बावजूद, कुछ लोग डॉक्टर पर शारीरिक हमला करने पर अड़े रहे, जिसकी आवाजें वीडियो में स्पष्ट हैं।

संगठन ने आरोप लगाया कि भीड़ का नेतृत्व करने वाले कुछ लोगों के राजनीतिक उद्देश्य प्रतीत होते हैं, जिन्होंने स्थिति का दुरुपयोग किया।

2. केवल प्रतिक्रिया दिखाई गई,कारण नहीं

सभी वीडियो मरीज के परिजनों द्वारा रिकॉर्ड किए गए, डॉक्टरों द्वारा नहीं।

डॉक्टर अपने चिकित्सकीय कर्तव्यों में संलग्न थे और किसी सार्वजनिक दृश्य को बढ़ाने का उनका कोई इरादा नहीं था।

डॉक्टरों को झेलनी पड़ी लगातार गाली-गलौज, धमकियाँ और दबाव को छिपाया गया, जबकि केवल एक संक्षिप्त प्रतिक्रिया को प्रमुखता दी गई।

3.गोपनीयता का गंभीर उल्लंघन और भ्रामक सूचनाएँ

डॉक्टर की व्यक्तिगत तस्वीर बिना अनुमति मीडिया को दी गई, जिससे उत्पीड़न और बदनामी हुई—यह गोपनीयता का गंभीर उल्लंघन है।

फर्जी और AI-जनित तस्वीरें/वीडियो फैलाए जाने का आरोप लगाया गया, जिनसे जनता को गुमराह किया जा रहा है।

ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों को खुली धमकियाँ दी गईं, जिससे उनकी सुरक्षा और जीवन खतरे में पड़े।

4. अस्पताल परिसर में अवैध जमावड़े

अस्पताल के भीतर नारेबाज़ी, बैठकें और भीड़ जुटाई गई, जो माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों का उल्लंघन है।

इन गतिविधियों से मरीजों की सुरक्षा खतरे में पड़ी और आवश्यक चिकित्सकीय सेवाओं में बाधा उत्पन्न हुई।

5. निष्पक्षता के लिए दोनों पक्षों को सुनना आवश्यक

SAMDCOT ने कहा कि डॉक्टर ने भी अपना पक्ष रखा है और उसे भी मरीज पक्ष की तरह समान दृश्यता और निष्पक्ष विचार मिलना चाहिए।

डॉक्टर विरोधी नहीं हैं, बल्कि कठिन और भावनात्मक परिस्थितियों में अत्यधिक दबाव के बीच जीवन बचाने वाले पेशेवर हैं।

उत्पीड़न, धमकियाँ, गलत सूचनाएँ और असुरक्षित कार्य-परिस्थितियाँ डॉक्टरों को सामूहिक कदम उठाने के लिए मजबूर करती हैं, जिसका असर अंततः रोगी-सेवा पर पड़ता है।

SAMDCOT संगठन ने जनता और सभी हितधारकों से आग्रह किया है कि—

अधूरी सच्चाइयों और अप्रमाणित सामग्री का प्रसार रोका जाए। निष्पक्ष, कानूनी और पारदर्शी जाँच को अपना काम करने दिया जाए। स्वास्थ्यकर्मियों और अस्पतालों की पवित्रता का सम्मान किया जाए।यदि भीड़ को उकसाने वाले और अस्पताल परिसर में भाषण देने वाले नेताओं के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई नहीं की गई, तो प्रदेशव्यापी आंदोलन किया जाएगा।

SAMDCOT ने दोहराया कि अस्पताल मरीजों और स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं—दोनों के लिए सुरक्षित स्थान बने रहने चाहिए

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments