मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
✍️✍️
गरीबी मनुष्य को जीवन की सबसे बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष करना सिखाती है। जब किसी व्यक्ति के पास भोजन, आश्रय और स्वास्थ्य सुविधाओं जैसे न्यूनतम जीवन स्तर के लिए पैसे नहीं होते, तो उसे वास्तविक भूख का अर्थ पता चलता है। यह अनुभव व्यक्ति को विनम्र बनाता है। वह समझता है कि एक रोटी का टुकड़ा जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर हो सकता है। यह सीख उसे भौतिकवादी दुनिया की क्षणभंगुरता का एहसास कराती है और उसे उन लोगों के साथ जोड़ती है जो समान परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं।
जिसने गरीबी की रोटियां खाई हैं, वह दूसरों की रोटियां कभी नहीं छीनता, यह एक सार्वभौमिक सत्य है क्योंकि गरीबी का दंश झेलने वाला व्यक्ति जानता है कि भूख क्या होती है ? इसलिए वह दयालु बन जाता है। यह अनुभव उसे सिखाता है कि जीवन में भौतिक संपत्ति से अधिक मानवीय गरिमा और सहानुभूति महत्वपूर्ण है। एक न्यायसंगत समाज का निर्माण तभी संभव है, जब हम व्यक्तिगत अनुभवों से सीखकर एक-दूसरे के प्रति संवेदनशील बनें और किसी का हक ना छीनें।
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

