मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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शिक्षा केवल डिग्री हासिल करने का साधन नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा सशक्त माध्यम है, जो व्यक्ति को गुलामी और कुरीतियों की जंजीरों को तोड़ने में मदद करता है। जो व्यक्ति शिक्षा की रोशनी से वंचित है, वह ना केवल अज्ञानता का शिकार होता है, बल्कि सामाजिक और आर्थिक रूप से भी कमजोर रहता है। इसलिए, शिक्षा का महत्व उस व्यक्ति के लिए सबसे अधिक है, जो अज्ञानता और शोषण के अंधेरे में फंसा हुआ है और स्वतंत्रता और गरिमा का जीवन जीने की चाहत रखता है।
जो व्यक्ति गुलामी और कुरीतियों से मुक्त नहीं है, उसके लिए शिक्षा का महत्व सीमित है, क्योंकि ज्ञान का असली उद्देश्य व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनाना और अन्याय के खिलाफ खड़े होने की क्षमता देना है। जब तक कोई व्यक्ति सामाजिक या मानसिक बंधनों में जकड़ा हुआ है, वह शिक्षा का पूरा लाभ नहीं उठा सकता और समाज व राष्ट्र के विकास में सक्रिय योगदान नहीं दे सकता। शिक्षा की सार्थकता व्यक्ति को ना केवल ज्ञानी बनाती है, बल्कि उसे सामाजिक अन्याय के प्रति सचेत और सशक्त भी बनाती है, जिससे वह इन बंधनों को तोड़ने में सक्षम हो सके।
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

