Thursday, February 26, 2026
Homeछिंदवाड़ा** जुमलों का दौर **

** जुमलों का दौर **

हर बार आता साल नया,
अवाम के जेहन में वहीं मलाल,
जिनके हाथों में नब्ज़ हुकूमत की,
आज बन गए भाई दलाल।
दूभर हुआ गरीबों का जीना,
नसीब नहीं रोटी दाल,
बेंच दिया हराभरा गुलशन,
खड़ी की नफरत की दिवाल।
सरहद की हिफाज़त करते करते,
शहीद हो रहें माओं के लाल,
भ्रष्टाचार में डूबे नुमाइंदे,
भर रहे खुद माया से ताल।
कबतक चलेगा जुमलों का दौर,
गूंज रहा बस एक सवाल,
चारों तरफ खौफ़नाक मंज़र,
कब टूटेगा दमन का जाल।
एस. आर. शेंडे,8103681228

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