Thursday, February 26, 2026
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भाषा मनुष्य के विचारों, भावनाओं, शिक्षा, सामाजिक स्थिति और व्यक्तित्व का है दर्पण

मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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भाषा, इंसान का एक ऐसा अदृश्य अंग है, जो व्यक्ति की सोच, भावनाओं और व्यक्तित्व को प्रतिबिंबित करता है। यह केवल शब्दों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि शारीरिक हाव-भाव, चेहरे के भाव और आँखों के संपर्क जैसी कई तरह से अभिव्यक्त होती है, जो व्यक्ति के आंतरिक विचारों और भावनाओं को दर्शाती हैं। यह हमारे विचारों को व्यक्त करने, दूसरों को समझने और सांस्कृतिक धरोहर को पीढ़ी दर पीढ़ी स्थानांतरित करने का सबसे शक्तिशाली माध्यम है।
भाषा मनुष्य के विचारों, भावनाओं, शिक्षा, सामाजिक स्थिति और व्यक्तित्व का दर्पण है। भाषा लोगों को जोड़ती है। यह सामाजिक संबंधों की नींव है, जिससे समुदाय बनते हैं और रिश्ते पनपते हैं। संवाद की गुणवत्ता हमारे सामाजिक जीवन की गुणवत्ता को सीधे प्रभावित करती है। वहीं भाषा एक अदृश्य शक्ति है, जो हमारे अस्तित्व के हर पहलू को आकार देती है और यह वास्तव में वह दर्पण है जिसमें एक इंसान के गुण और दोष सब कुछ दिखाई देते हैं।
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

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