मूकनायक/ दुर्गेंद्र सम्राट ब्यूरो प्रभारी बस्ती/ उत्तर प्रदेश
बस्ती। फेसबुक पर की गई टिप्पणी को लेकर गिरफ्तार की गई भारत मुक्ति मोर्चा महिला विंग की जिला अध्यक्ष एडवोकेट सरिता भारती को जेल से रिहा कर दिया गया उनकी रिहाई की खबर मिलते ही समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई बड़ी संख्या में लोग जेल के बाहर जुटे और फूल मालाओं से उनका जोरदार स्वागत किया
जानकारी के अनुसार सरिता भारती को नगर पुलिस ने बड़ेवन चौराहे से गिरफ्तार किया था बताया जाता है कि उन्होंने फेसबुक पर एक टिप्पणी की थी जिसे लेकर पुलिस ने गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया था गिरफ्तारी के बाद उन्हें मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया जहाँ से कोर्ट ने उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया था।
गिरफ्तारी के बाद भारत मुक्ति मोर्चा के कार्यकर्ताओं और महिला विंग की सदस्यों में आक्रोश फैल गया था संगठन ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा हमला बताया था
रिहाई के बाद जेल से बाहर निकलते ही सरिता भारती ने मीडिया से बातचीत में कहा मैंने कोई गलत टिप्पणी नहीं की थी मुझ पर कार्रवाई इसलिए की गई क्योंकि मैंने अन्याय और अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाई उन्होंने कहा जो शासन और सत्ता चला रहे हैं वे बहन-बेटियों के साथ हो रहे अपराधों पर मौन रहते हैं हाल ही में एक 9 साल की बच्ची के हत्याकांड के विरोध में हम धरने पर बैठे थे तभी एसआई अजय सिंह ने मेरा हाथ मरोड़ा और गाली-गलौज की मैं एक अधिवक्ता हूं फिर भी मुझे जेल भेजा गया और मेरे परिवार को 24 घंटे तक सूचना नहीं दी गई।
उन्होंने आगे कहा कि यह कार्रवाई उनकी आवाज दबाने की कोशिश है लेकिन वे न्याय और सच की लड़ाई जारी रखेंगी अगर हमें इंसाफ नहीं मिला तो हम केवल टिप्पणी ही नहीं करेंगे बल्कि आंदोलन करेंगे
वहीं भारत मुक्ति मोर्चा के नेता अमरजीत आर्या ने प्रशासन और सरकार पर तीखा हमला बोला उन्होंने कहा यह उत्तर प्रदेश पुलिस प्रशासन जो है वह बीजेपी और आरएसएस की कठपुतली हो चुकी है जब हमारे लोग इंसाफ के लिए आवाज उठाते हैं तो उन पर फर्जी मुकदमा और आईटी एक्ट जैसी धाराएँ लगा दी जाती हैं लेकिन जब दूसरे समुदाय के लोग बाबा साहब या हमारे महापुरुषों के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करते हैं तब पुलिस मौन रहती है हमने लालगंज और मुंडेरवा थाने के अंतर्गत टिप्पणी करने वाले व्यक्तियों के खिलाफ एप्लीकेशन दी लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई
इस पूरे घटनाक्रम ने जिले की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है एक ओर पुलिस प्रशासन इसे कानून-व्यवस्था का मामला बता रहा है वहीं दूसरी ओर संगठन इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला मान रहा है अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरिता भारती और उनका संगठन आगे क्या रुख अपनाते हैं।

