मूकनायक/ दुर्गेंद्र सम्राट ब्यूरो प्रभारी बस्ती/ उत्तर प्रदेश
कुशीनगर। अनिच्चा वत संखारा, सभी संस्कार अनित्य हैं तथागत बुद्ध के इस उपदेश को चरितार्थ करते हुए बौद्ध समाज के परम पूजनीय गुरु भदन्त ज्ञानेश्वर महास्थवीर, अध्यक्ष कुशीनगर भिक्खुसंघ अब इस नश्वर संसार में नहीं रहे। उन्होंने लखनऊ के मेदांता अस्पताल में अपनी अंतिम श्वास ली। उनके निधन से सम्पूर्ण बौद्ध अनुयायियों और श्रद्धालुओं में गहरा शोक व्याप्त है।
भदन्त ज्ञानेश्वर महास्थवीर लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे उपचार के दौरान उनका स्वास्थ्य अचानक बिगड़ गया जिसके बाद उन्हें लखनऊ के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था। चिकित्सकों के प्रयासों के बावजूद उन्होंने शांतिपूर्वक अपनी देह त्याग दी उनका पार्थिव शरीर आज शाम तक कुशीनगर लाया जाएगा, जहाँ बौद्ध भिक्षु-संघ, अनुयायी और श्रद्धालु अंतिम दर्शन करेंगे।
भदन्त ज्ञानेश्वर महास्थवीर ने अपने जीवन को पूर्ण रूप से धम्म प्रचार और समाज सेवा के लिए समर्पित किया था। वे उन विरले भिक्षुओं में से थे जिन्होंने न केवल बौद्ध धम्म की शिक्षाओं को जन-जन तक पहुँचाया बल्कि सामाजिक समरसता, शिक्षा, करुणा और अहिंसा के संदेश को भी व्यावहारिक रूप दिया उनके निर्देशन में कुशीनगर भिक्खुसंघ ने अनेक शिक्षण संस्थान, ध्यान केंद्र और सामाजिक उत्थान की योजनाएँ संचालित कीं।
उनकी शिक्षाओं का मूल उद्देश्य था “मनुष्य का उत्थान केवल बाहरी पूजा से नहीं, बल्कि भीतर की करुणा, मैत्री और प्रज्ञा से संभव है” इसी विचारधारा के कारण वे सभी समुदायों में समान रूप से आदर के पात्र बने।
कुशीनगर जो स्वयं बुद्ध के महापरिनिर्वाण का पवित्र स्थल है, वहाँ भदन्त ज्ञानेश्वर महास्थवीर का योगदान अविस्मरणीय रहा। उन्होंने यहाँ के बौद्ध तीर्थों के संरक्षण और अंतरराष्ट्रीय बौद्ध एकता को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
भिक्षु-संघ के सदस्यों ने बताया कि गुरुजी का अंतिम संस्कार कुशीनगर में पूर्ण बौद्ध रीति से किया जाएगा। देश-विदेश से भिक्षु, श्रद्धालु और बौद्ध धर्मानुयायी उनके अंतिम दर्शन हेतु पहुँच रहे हैं।
भदन्त ज्ञानेश्वर महास्थवीर के निधन से न केवल कुशीनगर बल्कि समूचे भारतीय बौद्ध समाज ने अपने मार्गदर्शक को खो दिया है। उनके अनुयायियों ने कहा गुरुजी भले ही शरीर रूप में हमारे बीच नहीं हैं पर उनके उपदेश और आदर्श सदैव हमारा मार्ग आलोकित करते रहेंगे।

