
छत्तीसगढ़
मूकनायक/ दिलीप मैश्राम
आदर्श बौद्ध महासभा नागसेन बुद्ध विहार ट्रस्ट समिति, डोंगरगढ़ ने सुप्रीम कोर्ट में घटित दुर्भाग्यपूर्ण घटना की निंदा एवं न्यायपालिका तथा संविधान संबंधी सुधारों हेतु अनुविभागीय अधिकारी राजस्व, डोंगरगढ़ के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति, भारत राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली को ज्ञापन दिया है।
ज्ञापन में लेख है कि हम, भारत के अधोहस्ताक्षरी नागरिक, आज दिनांक 5 अक्टूबर 2025 को प्रातः 11:35 बजे सुप्रीम कोर्ट में हुई एक अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण एवं निंदनीय घटना की कड़ी भर्त्सना करते हैं, जिसमें अधिवक्ता राकेश किशोर (Adv. Rakesh Kishor) ने भारत के माननीय मुख्य न्यायाधीश (CI) पर जूता फेंका।
यह कृत्य न केवल न्यायालय की अवमानना (Contempt of Court) है, बल्कि भारतीय न्यायपालिका की गरिमा, पवित्रता और संवैधानिक अधिकारिता पर सीधा आघात है। हम इस विध्वंसक, अराजक एवं असंवैधानिक व्यवहार की कठोर निंदा करते हैं और भारत सरकार तथा माननीय सर्वोच्च न्यायालय से आग्रह करते हैं कि इस पर कठोरतम कार्रवाई की जाए ताकि जनता का न्यायपालिका पर विश्वास अक्षुण्ण बना रहे। इस घटना के परिप्रेक्ष्य में तथा न्यायिक सुधारों और सामाजिक प्रतिनिधित्व की आवश्यकता को देखते हुए हम निम्नलिखित मांगें आपके समक्ष सादर प्रस्तुत करते हैं-
हमारी प्रमुख माँगें (Our Demands):
- राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के अंतर्गत कठोर कार्रवाई: अधिवक्ता राकेश किशोर पर राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के अंतर्गत तत्काल कार्रवाई की जाए, क्योंकि उनका यह कृत्य न्यायपालिका की गरिमा और संवैधानिक व्यवस्था पर हमला है। ऐसे दोषियों को उदाहरणात्मक दंड दिया जाए ताकि भविष्य में कोई इस प्रकार का अपराध करने का साहस न करे।
- “जाति उन्मूलन अधिनियम” (Annihilation of Caste Act) का निर्माणः भारतीय संसद द्वारा तत्काल एक व्यापक “जातिबंदी / जाति उन्मूलन कानून” पारित किया जाए, जो डॉ. भीमराव अंबेडकर के सामाजिक न्याय के सिद्धांतों से प्रेरित हो, ताकि भारत में जातिविहीन और समानतामूलक समाज की स्थापना हो सके।
- न्यायपालिका में आरक्षण का त्वरित क्रियान्वयनः भारत सरकार न्यायपालिका के सभी स्तरों निचली अदालतों से लेकर सर्वोच्च न्यायालय तक – अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक एवं महिलाओं के लिए आरक्षण तत्काल लागू करे, जिससे वास्तविक सामाजिक न्याय और विविधता को सुनिश्चित किया जा सके। ओबीसी क्रीमी लेयर खत्म की जाये।
- इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 16 सितंबर (न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर) के आदेश का देशव्यापी क्रियान्वयनः न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर द्वारा 16 सितंबर को दिए गए इलाहाबाद उच्च न्यायालय के ऐतिहासिक निर्णय -जिसमें सरकारी अभिलेखों से जाति पहचान हटाने और जाति महिमामंडन रोकने का निर्देश दिया गया को सर्वोच्च न्यायालय की देखरेख में पूरे देश में लागू किया जाए।
- संवैधानिक पीठ और निर्वाचन आयोग में सामाजिक प्रतिनिधित्वः सर्वोच्च न्यायालय की संवैधानिक पीठ (Constitution Bench) तथा भारत निर्वाचन आयोग (ECI) में सभी सामाजिक वर्गों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाए। संरचना निम्नलिखित हो
1 अनुसूचित जनजाति (ST) सदस्य
2 अनुसूचित जाति (SC) सदस्य
4 अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) सदस्य
1 अल्पसंख्यक (Minority) सदस्य
2 सदस्य जो अंतर्जातीय / अंतर्धार्मिक विवाह से उत्पन्न हो
1 सामान्य वर्ग (General Category) सदस्य
यह संरचना सामाजिक विविधता, पारदर्शिता और समान भागीदारी को सुनिश्चित करेगी।
- मनुस्मृति समर्थक पुजारियों की अराजकता पर रोकः मनुस्मृति समर्थक पुजारियों की निरंकुशता और प्रभाव ने उस युवा पीढ़ी के मनोविज्ञान को विषाक्त कर दिया है जो लोकतंत्र, समानता और संविधान में आस्था रखती है। ये तत्व अपने भाषणों और अभियानों के माध्यम से घृणा, जातिवाद और भेदभाव को बढ़ावा दे रहे हैं। वे संविधान, डॉ. भीमराव अंबेडकर, और भारत के वंचित वर्गों के विरुद्ध अपमानजनक वक्तव्य दे रहे हैं।
अतः ऐसे सभी व्यक्तियों और संगठनों पर, जो लोकतंत्र, एकता, अखंडता और संविधान के लिए खतरा हैं, कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए और उन्हें कानून एवं संविधान के प्रति सम्मान के लिए बाध्य किया जाए।
हम दृढ़ता से विश्वास करते हैं कि लोकतंत्र और न्याय की नींव गरिमा, विविधता और अनुशासन पर आधारित है।
अतः हम आपसे निवेदन करते हैं कि इस गंभीर घटना का संज्ञान लेकर, उत्तरदायित्व तय करें, और आवश्यक संवैधानिक व न्यायिक सुधारों की प्रक्रिया आरंभ करें ताकि समानता और बंधुत्व की भावना, जो हमारे संविधान की आत्मा है, सुरक्षित रह सके।

