



मूकनायक/ छत्तीसगढ़
दमोह (बालाघाट) प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी बौद्ध अनुयायियों द्वारा डां आम्बेडकर मण्डल दमोह के तत्वाधान में प्रज्ञादीप बुद्ध विहार दमोह में सौहार्द पूर्ण वातावरण में हर्षोल्लास धम्म चक्र प्रर्वतन दिवस मनाया गया।कार्यक्रम का शुभारंभ भंते के द्वारा त्रिशरण पंचशील और बुद्ध वंदना के साथ हुआ। अतिथियों ने डॉ. अंबेडकर एवं तथागत गौतम बुद्ध की प्रतिमाओं पर पुष्पांजलि अर्पित की। प्रमुख अतिथि के रुप में पूज्य भंते बोधि धम्म, सामाजिक चिंतक तेजलाल उके, डां आम्बेडकर मण्डल के अध्यक्ष सुमरनलाल खोबरागड़े, महिला मण्डल की वरिष्ठ संरक्षक सदस्य आयुष्मति चमन ताई रामटेके को मंचासिन कर उनका पुष्प गुच्छ से स्वागत किया गया। स्वागत की श्रंखला में बड़ी तादाद में उपस्थित उपासक, उपासिकाओ का पुष्प वर्षा कर सामूहिक स्वागत किया गया। प्रमुख वक्ता आयुष्मति स्वेजा उके, ममता भौतेकर, संगीता उके, कविता रामटेके, वंदना भेलावे , जितेन्द्र रामटेके एवं एस.आर.उके ने अपने सम्बोधन में कहा गया कि, अशोक विजयादशमी में सम्राट अशोक ने कलिंग युद्ध के बाद हिंसा का मार्ग त्याग कर बौद्ध धर्म को अपनाया था, जो शांति और अहिंसा की जीत का प्रतीक है। उसी तिथि में डां बाबासाहेब आंबेडकर द्वारा समानता, न्याय और मानवता के लिए भारतभूमि में पैदा हुए बौद्ध धम्म की दिक्षा लेकर इस धर्म का पुनरुत्थान किया उनके देशभक्ति और राष्ट्रीय विचारधारा से हमारे देश को विश्व गुरु का दर्जा और विश्वपटल पर भारत को बुद्ध की धरती का गौरव प्राप्त हुआ। वह दिन था 14अक्टूबर 1956 नागपुर की पवित्र दीक्षा भूमि जहां बाबा साहब डॉ भीमराव आंबेडकर ने 1935 में ली गई प्रतिज्ञाओं को 21वर्षो के बाद पूरा कर लगभग अपने सात लाख अनुयायियों के साथ बुद्ध की शरण ली थी। इस धम्म चक्र प्रर्वतन के माध्यम से बाबा साहब ने समानता, न्याय, और मानवता की स्थापना कर बुद्ध की करूणा, शांति और सत्य को अपनाने का संदेश दिया था। उनकी शिक्षाओं का अपने जीवन में आचरण कर समाज को शीलवान, संस्कारवान, चरित्रवान एवं निष्ठावान बनाने का संकल्प लेना चाहिए। कार्यक्रम को सफल बनाने में समाज के सभी महिला पुरुषो का सराहनीय योगदान रहा। जिनका आभार प्रदर्शन समिति के अध्यक्ष और सफल मंच संचालन एस आर उके द्वारा किया गया। रात्रि में बुद्ध विहार एवं सभी घरों में दीप प्रज्ज्वलित कर बौद्ध अनुयायियों के द्वारा उत्सव मनाया गया। इस अवसर पर ग्राम वासियों द्वारा भी बौद्ध अनुयायियों को शुभकामनाएं दी गई।

