मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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दुख, दर्द और मुश्किल परिस्थितियाँ व्यक्ति को शारीरिक और मानसिक रूप से बूढ़ा महसूस कर देती हैं क्योंकि यही अनुभव तनाव बढ़ाते हैं और जीवन की गुणवत्ता पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं। हालाँकि, बुढ़ापा अपने आप में उम्र बढ़ने से जुड़ा एक स्वाभाविक और जटिल जैविक प्रक्रिया है। इसलिए, यह विचार कि दुख और परिस्थितियाँ बुढ़ापे का कारण बनती हैं । जब व्यक्ति की हिम्मत टूट जाती है या उसे लगने लगता है कि अब आगे बढ़ने का कोई रास्ता नहीं है तो उसका उत्साह और जोश खत्म हो जाता है। यह मानसिक स्थिति उसे समय से पहले ही बूढ़ा महसूस कराती है, भले ही उसकी शारीरिक उम्र कम हो।
यह विचार व्यक्त करता है कि बुढ़ापा केवल शारीरिक उम्र का परिणाम नहीं है, बल्कि दुख, दर्द और प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण होने वाला मानसिक और भावनात्मक प्रभाव भी है । कई लोग महसूस करते हैं कि भारी अनुभव इंसान को थका देते हैं और उसकी मानसिक ऊर्जा छीन लेते हैं, जिससे वह अपनी उम्र से पहले ही बूढ़ा लगने लगता है । उम्र का बढ़ना सिर्फ एक शारीरिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि अनुभव और भावनाओं का भी परिणाम है। दुख और कठिन परिस्थितियाँ व्यक्ति की आत्मा को थका देती हैं और उसे उम्र से ज़्यादा मानसिक रूप से बूढ़ा बना देती हैं।
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

