मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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व्यक्ति के जीवन में आत्म सम्मान के बिना सब कुछ अधूरा है। वह तरक्की करने की कोशिश नहीं करेगा क्योंकि पढ़ना -लिखना, मेहनत करके सामने वाले को प्रभावित करके प्रशंसा पाने की जब इच्छा ही खत्म हो जाएगी, तब वह किसके लिए क्यों कोई काम करेगा । हर काम में मेहनत करनी पड़ती है, अपनी जरूरी इच्छा को रोकना पड़ता है, यदि आत्म सम्मान की भावना खत्म कर दी जाएगी, तब कोई इंसान इतना त्याग क्यों करना चाहेगा । इंसान के मन में पाने की इच्छा होती है, तभी वह दिन व रात की नींद और आराम का त्याग करके काम करता है । उसे लगता है यदि वह परिवार के लिए काम नहीं करेगा, तब वे उसे सम्मान भी नहीं देंगे । यही पाने की इच्छा उसे आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करती है । एक अमीर और गरीब इंसान के जीवन की तुलना करके देखिए, आपको अंतर समझ में आ जाएगा । अमीर इंसान को देखकर ही आपके अंदर उसके जैसा बनने की इच्छा पैदा हो जाती है ।
वहीं गरीब इंसान को देखना भी लोग पसन्द नहीं करते । समाज में गरीब को इज्जत देने वाले विरले ही मिलते हैं । गरीब का घर, उसका रहन -सहन, जीवन -यापन का तरीका और खान -पान हमें उसके जैसा बनने के लिए प्रोत्साहित नहीं करता क्योंकि उसे कहीं सम्मान नहीं मिलता है । लोग उसे अपना रिश्तेदार कहने से भी घबराते है। इसलिए सादगी एक सच्चा और सम्माननीय गुण है। दिखावा करना या अपनी हैसियत को हर जगह जताना सही नहीं है। लेकिन जब कोई आपके आत्मसम्मान पर बार बार हमला करे, तो चुप रहना भी कायरता है। ऐसे में अपनी हैसियत का परिचय देकर अपनी गरिमा को बनाए रखना आवश्यक हो जाता है। सादगी इंसान का आभूषण है, लेकिन आत्मसम्मान उसकी ढ़ाल है। इन दोनों के बीच संतुलन बनाए रखना ही एक सुसंस्कृत और आत्मविश्वासी इंसान की निशानी है।
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

