मूकनायक/ देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
हम सब जानते हैं कि आज 2 अक्टूबर 2025 धम्मचक्र प्रवर्तन दिवस यानि चक्रवर्ती सम्राट अशोक विजयदशमी है ।जैसा कि हम सबको पता है चक्रवर्ती सम्राट अशोक ने कलिंग युद्ध को जीतने के 10 दिन बाद इसी दिन बौद्ध धर्म को अपनाया था। युद्ध को जीतने के बाद उन्हें इतनी आत्मग्लानि हुई कि उन्होंने हिंसा को छोड़कर अहिंसा का मार्ग अपनाया और मानवता को ही अपना धर्म बनाया। इसी उपलक्ष्य पर हम सब जो बाबासाहेब को अपना आदर्श मानते हैं और बौद्ध धम्म को अपने विचारधारा तो हमारे लिए आज सम्राट अशोक विजयदशमी है
जब सम्राट अशोक ने बौद्ध धम्म को अपनाया था। तो उन्होंने पूरे देश में बौद्ध स्तूप और मट्ठ बनवाए थे जिससे कि बौद्ध धर्म का निर्माण किया जा सके और उसे पूरे विश्व में फैलाया जा सके। परंतु हमारा यह दुर्भाग्य है की बहुत सारे स्तूप के और मट्ठों को तहस-नहस कर दिया गया उन्हें मिटा दिया गया परंतु यह सौभाग्य भी है कि यह सब मिट कर भी नहीं मिट पाया। आज भी अगर हम गौर से देखें तो हमारी विरासत जिंदा मिलेगी।
जब हम विजय दिवस की बात करते हैं, तो यह केवल युद्ध जीतने के लिए नहीं होती है बल्कि मानवता, समानता और भाईचारे की बात भी होती है। जैसे कि हमारे बाबा साहब बताते हैं के राजनीतिक स्वतंत्रता से ज्यादा महत्वपूर्ण सामाजिक स्वतंत्रता है। इसका अभिप्राय है कि जब हमें सामाजिक स्वतंत्रता प्राप्त होगी या हम सामाजिक तौर पर अधिक एक दूसरे के साथ जुड़े होंगे तभी हमारा समाज और देश ज्यादा ताकतवर होगा। बाबासाहेब ने भी बौद्ध धम्म को अपना कर विजय दिवस का उदाहरण दिया है तो हम इस दिन को विजय दिवस के रूप में भी याद करते हैं। उन्होंने दीक्षा भूमि पर 6,00,000 लोगों से भी अधिक बौद्ध धम्म दीक्षा ली थी। इस मार्ग से लाखों लोगों को धर्म परिवर्तन का मार्ग दिखाया था और बौद्ध धम्म को पुनर्जीवित किया था। जिसमें 22 प्रतिज्ञाओं को दोहराया जाता है। यह दिन 14 अक्टूबर 1956 को अशोक विजयदशमी के रूप में भी मनाया जाता है।
यह हमारे लिए गौरव की बात है कि बाबा अंबेडकर और बौद्ध बाबा जैसे महान महापुरुषों को हम आदर्श मानते हैं,और सम्राट अशोक की विरासत को हम सब आगे बढ़ने का प्रयास कर रहे हैं। साथ साथ डॉ अंबेडकर और बौद्ध धम्म पर अग्रसर हो रहे हैं।सम्राट अशोक विजयदशमी पर सबको हार्दिक शुभकामनाएं।
पत्रकार : नीलम अंबेडकर
जिला के ब्यूरो सोनीपत हरियाणा।

