
मूकनायक
छत्तीसगढ़
वास्तव में इस दुनिया में क्या लेकर आए थे और क्या लेकर जाएंगे….खाली हाथ ही आए थे और खाली हाथ ही जाएंगे,तो फिर आइए !जीते जी तो हमने बहुत भला किया है क्यों न मौत के बाद भी भला कर जाए…मौत के बाद भी भला कर जाए।
सन 2012 में अपने लिए लिया वो संकल्प जो आज आपके लिए काम आ रहा है... इसी शृंखला को आगे बढ़ाते हुए कल 22 सितंबर दिन सोमवार को दुर्ग के खंडेवाल कॉलोनी मधुबन उद्यान के पास स्थित राजगृह निवासी बीएसपी शिक्षण संस्थान से सेवानिवृत शिक्षक - शिक्षिका दंपत्ति आयुष्मान फूलचंद कामडे,आयुष्मती प्रभावती कामड़े और पुत्र आयुष्मान प्रशांत कामड़े ने दि बुद्धिष्ट प्रचारक विंग, छत्तीसगढ़ संस्था के माध्यम से मरणोपरांत देहदान की घोषणा की वसीयत दि बुद्धिष्ट प्रचारक विंग की संस्थापिका सविता बौद्ध "संकल्पी" को सौंपी । विंग द्वारा सम्मान प्रमाण - पत्र देकर तीनों को सम्मानित किया गया। मरणोपरांत इनका पार्थिव शरीर मेडिकल कॉलेज विद्यार्थियों के अध्ययन अध्यापन के लिए रायपुर एनाटॉमी भेजा जाएगा । इस अवसर पर आयुष्मान महेंद्र बौद्ध उपस्थित रहे। देहदान और अंगदान के विषय में सविता बौद्ध संकल्पी का कहना है - "मानव जीवन में धम्मदान,देहदान और अंगदान दानों में सर्वश्रेष्ठ दान है, यह पुनीत कार्य स्वयं करके, दूसरों को भी जागरूकता अभियान के माध्यम से प्रेरित करना एक कल्याण मित्र का कार्य है"।

