मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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आलसी मन शैतान का घर होता है जो हमें सिखाता है कि जब हम आलसी और निष्क्रिय होते हैं, तो बुरे विचार हमारे मन में आसानी से प्रवेश कर जाते हैं । जब कोई व्यक्ति आलस्य से ग्रस्त हो जाता है, तो उसके मन में तरह-तरह के बुरे विचार आने लगते हैं और यह शैतान के लिए बुरे काम करने का आदर्श स्थान बन जाता है। जिस आदमी की काम करने की रुचि नहीं होती, वह अपना समय गप्पे हांकने में खर्च करता रहता है या फालतू की नकारात्मक बातें सोच कर अपना दिमाग और स्वास्थ्य खराब करता रहता है। उसके पास काम होते हुए भी वह काम टालने का प्रयास करता है, काम नहीं करने के कई बहाने ढूंढता रहता है।
वहीं जो आदमी काम करना चाहता है, वह कोई काम नहीं होते हुए भी कोई न कोई काम ढूंढ लेता है, जबकि नकारात्मक दिनचर्या हमें यह सिखाती है कि जीवन में आलस्य का कोई स्थान नहीं होना चाहिए। चाहे छात्र हों या कामकाजी व्यक्ति, हर किसी को अपने दिमाग को सही दिशा में व्यस्त रखने की कला सीखनी चाहिए। जो व्यक्ति अपने खाली समय का सदुपयोग करता है, वह न केवल खुद को बुरे विचारों से बचाता है, बल्कि अपने और समाज के लिए भी सकारात्मक बदलाव लाता है। इसलिए हमें हमेशा व्यस्त और सक्रिय रहकर अपने दिमाग को शैतान के घर की जगह, एक रचनात्मक और उपयोगी कार्यशाला बनाना चाहिए।
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

